
पटना। दिल्ली से पटना लौटे बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की कानून-व्यवस्था, शराबबंदी और शिक्षा प्रणाली को लेकर नीतीश सरकार पर तीखा प्रहार किया है। पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी ने 10 साल पुरानी शराबबंदी नीति को सिरे से नकारते हुए इसे सत्ताधारियों का एक बड़ा रैकेट करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने सीवान गोलीकांड को लेकर 19 अगस्त को राजभवन मार्च की घोषणा भी की।शराबबंदी कानून की सफलता पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में यह कानून पूरी तरह से विफल हो चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “कौन से ब्रांड का दारू बिहार में नहीं मिल रहा है? हरेक कंपनी की दारू की होम डिलीवरी हो रही है।” उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि सिर्फ कहने के लिए राज्य में शराबबंदी है, जबकि हकीकत में सत्ता में बैठे लोग इसका अवैध कारोबार चला रहे हैं। एनडीए के भीतर इस कानून को लेकर मचे घमासान और इसकी समीक्षा के सवाल पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इसका जवाब मुख्यमंत्री और सम्राट चौधरी को देना चाहिए।राज्य में रोजगार और शिक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए तेजस्वी ने कहा कि बिहार शिक्षा के मामले में सबसे फिसड्डी राज्य साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां कोई भी बहाली बिना पेपर लीक के पूरी नहीं होती। कभी भी निष्पक्ष तरीके से चयन नहीं हो पाया है, जिससे बिहार अब पेपर लीक की राजधानी बनता जा रहा है।
उन्होंने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एक करोड़ नौकरी का वादा करने वाले अब तक एक लाख नौकरियां भी नहीं दे पाए हैं।सीवान में छात्रों पर एके-47 से हुई फायरिंग के मामले में तेजस्वी यादव ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने सवाल दागा कि छात्रों पर गोलियां चलाने का आदेश आखिरकार किसने दिया? उन्होंने कहा कि इस गंभीर मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है; केवल एक सिपाही को बर्खास्त कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है, जबकि एसपी स्तर के किसी भी अधिकारी पर गाज नहीं गिरी। इसके विरोध में 19 अगस्त को पटना में राजद की ओर से एक विशाल मार्च निकाला जाएगा, जिसमें राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से ‘अर्बन नक्सल’ कहे जाने पर भी तेजस्वी यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब किसान अपने हक के लिए आंदोलन करते हैं, तो उन्हें ‘खालिस्तानी’ कह दिया जाता है और अब ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व के प्रधानमंत्रियों ने कभी ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया, इसलिए वर्तमान पीएम को इससे बचना चाहिए। नीट (NEET) मामले का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और यह गारंटी देनी चाहिए कि भविष्य में ऐसा कोई पेपर लीक नहीं होगा।



