
पटना। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को परिसर में उस समय एक दिलचस्प और नाटकीय नजारा देखने को मिला, जब बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र धारण कर ‘पुजारी’ के वेश में पहुंच गए। अयोध्या स्थित राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं का विरोध जताने के लिए उन्होंने यह अनोखा तरीका अपनाया। हाथ में दानपेटी लिए पप्पू यादव ने विपक्षी सांसदों से चंदा मांगना शुरू किया, जिसका समापन उनके चंदा लेकर ‘भागने’ के अभिनय के साथ हुआ।संसद परिसर में विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा एक लघु नाटिका (शॉर्ट प्ले) का मंचन किया गया। पुजारी बने पप्पू यादव सांसदों के पास जाकर दान मांगने लगे। इस दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के कई सांसदों ने उन्हें पैसे दिए। नाटकीय मोड़ तब आया जब पप्पू यादव दानपेटी में पैसे डालने के बजाय उन्हें अपने पास रखकर भागने लगे। इसके बाद अन्य विपक्षी सांसदों ने उन्हें पकड़ने का अभिनय किया।
विपक्ष के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने के लिए था। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद के पैर छूते भी दिखाई दिए।इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी वहां मौजूद थीं और पीछे खड़ी दिखाई दीं। मौके पर सपा सांसद डिंपल यादव सहित ‘इंडिया’ गठबंधन के कई अन्य नेता भी उपस्थित थे। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए ‘चंदा चोर-गद्दी छोड़’ के जोरदार नारे लगाए।प्रदर्शन के उपरांत अपनी बात रखते हुए सांसद पप्पू यादव ने कहा कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम के मंदिर के लिए पूरी आस्था के साथ दान दिया है। उन्होंने कहा, “आज 100 करोड़ से अधिक लोग जिन्होंने चंदा दिया है, भारत के किसी न किसी मंदिर, गुरुद्वारे, चर्च, कहीं पर भी, आज साथ खड़े हैं।
केदारनाथ हो, बदरीनाथ हो या फिर दक्षिण का कोई मंदिर हो, सभी की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है।”यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले का ऑडिट क्यों नहीं होना चाहिए? इसे आरटीआई (RTI) के दायरे में क्यों नहीं लाया गया और एसआईटी (SIT) के जरिए इसकी जांच क्यों नहीं हो रही? विपक्षी नेताओं ने एक सुर में मांग की है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले की सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज की निगरानी में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।



