
पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से ठीक पहले, जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर (पीके) ने बिहार की एनडीए (NDA) सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर बड़ा हमला बोला है। रविवार को प्रेस को संबोधित करते हुए पीके ने चुनाव आयोग को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि चुनाव में ‘जीविका दीदियों’ के राजनीतिक इस्तेमाल पर आयोग ने 24 घंटे के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो जन सुराज आयोग के सामने धरना देगा।प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव में जीविका दीदियों के नेटवर्क का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है, जिसे तुरंत बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार आधिकारिक तौर पर इन्हें चुनाव कार्य में शामिल कर रही है, जबकि ये सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। बूथों पर विभिन्न सेवाएं देने के बहाने इन्हें तैनात किया जाता है, ताकि ये वोटरों को एनडीए के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रभावित कर सकें। पीके ने इसे लोकतंत्र के लिए सही नहीं बताया। साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2025 के विधानसभा चुनाव में भी वोटरों को प्रभावित करने के लिए इन्हें गांव-गांव लगाया गया था। जन सुराज का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही चुनाव आयोग से मिलकर इसकी आधिकारिक शिकायत करेगा।

पीके ने सरकारी मशीनरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग और अधिकारी ज्ञापनों को अक्सर दरकिनार कर देते हैं। उन्होंने एक बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जीविका दीदियां गांव-गांव जाकर वोटरों में यह डर पैदा कर रही हैं कि यदि सत्ताधारी दल का प्रत्याशी चुनाव हार गया, तो उन्हें मिलने वाला मुफ्त गेहूं-चावल और पेंशन बंद हो जाएगी। इसके अलावा, नए जनप्रतिनिधि अन्य सरकारी सेवाओं पर भी रोक लगा देंगे। इसी डर और लालच के कारण मतदाता न चाहते हुए भी उन्हें वोट देने को मजबूर हो जाते हैं।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बांकीपुर दौरे पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने दावा किया कि भाजपा यहां चुनाव हार रही है, इसीलिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर दिल्ली और पटना के तमाम बड़े नेता गली-गली की खाक छान रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए लोगों को डराया जा रहा है, खरीदा जा रहा है और खुलेआम पैसे बांटे जा रहे हैं।प्रशांत किशोर ने हाल ही में सरकार के 100 दिनों के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी सरकारी खर्चे पर जीविका दीदियों की भीड़ जुटाई गई थी। पटना डीएम के एक हालिया ट्वीट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इससे सरकार की मंशा साफ हो गई है। पीके ने मांग की है कि जिलाधिकारी तुरंत आदेश जारी कर जीविका दीदियों को चुनाव प्रक्रिया से पूरी तरह अलग करें।



