
देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा उस समय सौंपा, जब केंद्र सरकार और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रतिनिधिमंडल के बीच तीसरे दौर की बातचीत शुरू होने वाली थी। NEET-UG पेपर लीक विवाद, छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शन और जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच लिया गया यह फैसला देश की राजनीति में बड़ी हलचल का कारण बन गया है।
इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पत्र साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने निर्णय के पीछे की वजह विस्तार से बताई। उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में कभी भी जिम्मेदारियों से पीछे हटने का प्रयास नहीं किया। पिछले चार दशकों से वे छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम करते रहे हैं। उनके अनुसार, किसी भी देश की प्रगति एक मजबूत और पारदर्शी शिक्षा प्रणाली पर निर्भर करती है।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि 3 मई को NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलते ही केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। मामले की जांच CBI को सौंपी गई और परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की गई। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वर्ष 2027 से NEET परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कराने का फैसला भी लिया गया।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में कुछ लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। उन्होंने लिखा कि यह मुद्दा केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। उनका मानना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय को राजनीतिक विवादों और कानूनी लड़ाइयों में नहीं उलझना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
गौरतलब है कि CJP लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही थी। पार्टी प्रमुख अभिजीत दिपके 28 जून से अपने समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे। इसी आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर शामिल हुए थे, हालांकि उन्होंने दो दिन पहले अपना अनशन समाप्त कर दिया। इसके बावजूद CJP ने अपना आंदोलन जारी रखा।
बीते दिन केंद्र सरकार और CJP के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई, जिसमें दो प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई थी। हालांकि पार्टी ने साफ कर दिया था कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने इस मांग पर विचार करने के लिए 24 घंटे का समय मांगा था और आज निर्धारित बैठक से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया।



