
पटना में छात्रों के प्रदर्शन के बाद बिहार विधानसभा का माहौल भी पूरी तरह गरमा गया। मानसून सत्र के दौरान डाकबंगला चौराहे पर हुए पथराव और प्रदर्शन का मुद्दा सदन में उठा, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर हंगामा हुआ। हालात इतने बिगड़ गए कि विधायकों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। बढ़ते विवाद को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही भोजनावकाश तक स्थगित करनी पड़ी।
गुरुवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने छात्रों के प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया। वहीं सत्ता पक्ष ने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पथराव का मुद्दा उठाया। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
हंगामे के दौरान भाजपा के पिपरा विधायक श्यामबाबू यादव और विपक्ष के विधायक आईपी गुप्ता के बीच तीखी बहस हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के विधायक आमने-सामने आ गए। कुछ समय के लिए ऐसी स्थिति बन गई कि धक्का-मुक्की और मारपीट होने की आशंका पैदा हो गई।
स्थिति को बिगड़ता देख विधानसभा के मार्शलों और अन्य विधायकों ने बीच-बचाव किया। करीब आधा दर्जन मार्शलों और कई वरिष्ठ विधायकों ने दोनों पक्षों को अलग किया, जिसके बाद मामला किसी तरह शांत हुआ। हालांकि सदन में लगातार नारेबाजी और शोर-शराबा जारी रहा।
हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। पहली पाली में कोई भी सरकारी कामकाज नहीं हो पाया। यहां तक कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की महत्वपूर्ण रिपोर्ट भी सदन के पटल पर पेश नहीं की जा सकी। लगातार हंगामे के कारण अध्यक्ष ने कार्यवाही चलाने की कई बार कोशिश की, लेकिन जब व्यवस्था नहीं बन सकी तो उन्होंने सदन को भोजनावकाश तक के लिए स्थगित कर दिया।
बुधवार को पटना में नीट परीक्षा में कथित धांधली को लेकर छात्रों का बड़ा प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन के दौरान डाकबंगला चौराहे पर तनाव की स्थिति बन गई थी और पथराव की घटनाएं भी सामने आई थीं। इसी घटना को लेकर विधानसभा में भी राजनीतिक विवाद तेज हो गया। सत्ता पक्ष का कहना है कि प्रदर्शन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा फैलाने की कोशिश की, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति और गर्म हो गई है। विधानसभा में जिस तरह का हंगामा और टकराव देखने को मिला, उसने लोकतांत्रिक कार्यवाही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सदन में महत्वपूर्ण सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ और जनता से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल इतना तय है कि छात्रों के प्रदर्शन और डाकबंगला पथराव का मामला अब सड़क से निकलकर विधानसभा के भीतर भी राजनीतिक टकराव का बड़ा कारण बन चुका है।



