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पटना में ई-रिक्शा चालकों के सामने नई चुनौती, चलते-चलते बंद हो रहे वाहन

बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों ई-रिक्शा चालकों को एक अनोखी तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। कई चालक शिकायत कर रहे हैं कि सड़क पर चलते समय उनके ई-रिक्शे अचानक बंद हो जाते हैं और काफी कोशिश के बाद भी तुरंत दोबारा चालू नहीं होते। इस वजह से न सिर्फ यात्रियों को परेशानी हो रही है, बल्कि चालकों की कमाई भी प्रभावित हो रही है।

पटना और आसपास के क्षेत्रों में अब तक करीब 200 से 250 ई-रिक्शों में ऐसी समस्या सामने आ चुकी है। शुरुआत में इसे सामान्य तकनीकी खराबी माना गया, लेकिन जब कई वाहनों की जांच की गई तो उनमें कोई बड़ी यांत्रिक खराबी नहीं मिली। इसके बाद जांच का फोकस बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी BMS पर गया।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि यह दिक्कत मुख्य रूप से उन ई-रिक्शों में देखी जा रही है, जिनमें ब्लूटूथ आधारित लिथियम-आयन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम लगा है। इस सिस्टम का उपयोग बैटरी की निगरानी और उसकी कार्यक्षमता पर नजर रखने के लिए किया जाता है। हालांकि, यदि इसकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो तो कोई व्यक्ति मोबाइल ऐप के जरिए इससे कनेक्ट होकर बैटरी को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो भी वायरल हुए हैं, जिनमें कुछ लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-रिक्शा बंद करते हुए दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे पारंपरिक अर्थों में हैकिंग नहीं कहा जा सकता, बल्कि कमजोर सुरक्षा वाले ब्लूटूथ BMS का गलत इस्तेमाल माना जा रहा है।

यह समस्या केवल पटना तक सीमित नहीं है। दिल्ली सहित देश के कई शहरों से भी ऐसे मामले सामने आए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ संगत ई-रिक्शों को मोबाइल ऐप की मदद से नियंत्रित या बंद किया जा सकता है। इससे सड़क सुरक्षा के साथ-साथ चालकों की आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जिन ई-रिक्शों में लेड-एसिड बैटरी लगी है या जिनके BMS में मजबूत सुरक्षा और पासवर्ड प्रोटेक्शन मौजूद है, वे इस समस्या से प्रभावित नहीं हो रहे हैं। इसलिए वाहन मालिकों को सलाह दी जा रही है कि वे अधिकृत सर्विस सेंटर या बैटरी विक्रेता से संपर्क कर अपने BMS का फर्मवेयर अपडेट कराएं, डिफॉल्ट सेटिंग्स बदलवाएं और ब्लूटूथ एक्सेस को सुरक्षित बनाएं।

ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि यदि इस तकनीकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो उनकी रोजमर्रा की आय पर गंभीर असर पड़ सकता है। वहीं विशेषज्ञों ने बैटरी निर्माताओं और संबंधित एजेंसियों से सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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