
पटना: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस मुख्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में स्थानीय शाहपुर पुलिस की ओर से गंभीर चूक और लापरवाही की बात स्वीकार की है। लापरवाही के आरोप में शाहपुर थानाध्यक्ष (SHO) समेत 5 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।इस हाई-प्रोफाइल मामले की विभागीय जांच का जिम्मा शाहाबाद रेंज के डीआईजी को सौंपा गया है। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं।बिहार पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने बताया कि जब पहली बार शाहपुर थानाध्यक्ष अपनी टीम के साथ आरोपी भरत तिवारी के घर पहुंचे थे, तब टीम स्थिति को सही और पेशेवर तरीके से संभालने में पूरी तरह नाकाम रही। “शाहपुर पुलिस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम में बड़ी लापरवाही सामने आई है।

इसी चूक को देखते हुए एक थानाध्यक्ष, दो सब-इन्स्पेक्टर (SI), एक एएसआई (ASI) और दो सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया है। घटना की हर पहलू से विस्तृत जांच की जा रही है।”> सुधांशु कुमार, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर)एडीजी ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कानून के तहत दो अलग-अलग एफआईआर (FIR संख्या 179/26 और 170/26) दर्ज की गई हैं। दोनों मामलों की जांच अलग-अलग स्तरों पर वैज्ञानिक और विधि-सम्मत तरीके से की जा रही है। उपलब्ध सभी डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।एनकाउंटर की वैधता पर बात करते हुए एडीजी सुधांशु कुमार ने कहा कि कानून के मुताबिक, अगर कोई अपराधी पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करता है, तो पुलिस को आत्मरक्षा (Self-Defense) में जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, बीते 17 जून को शाहपुर के बिलौटी गांव में हुए इस एनकाउंटर को लेकर भरत तिवारी के परिजनों और कई राजनीतिक दलों ने पुलिसिया दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष और परिजनों का आरोप है कि यह एकतरफा कार्रवाई थी। पुलिस मुख्यालय का कहना है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच जारी है और अंतिम सच जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।



