
पटना। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार जारी है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए रविवार को पटना सिटी में भाकपा (माले) पटना साहिब इकाई की ओर से एक आक्रोशपूर्ण प्रतिरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान उग्र कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
पीर अली स्मारक से शुरू होकर भगत सिंह चौक तक पहुंचा मार्च
पटना साहिब कमेटी के सचिव अनय मेहता के नेतृत्व में निकाला गया यह प्रतिरोध मार्च मंगल तालाब स्थित अमर शहीद पीर अली के स्मारक से शुरू हुआ। हाथों में लाल झंडे, बैनर और तख्तियां लिए सैकड़ों कार्यकर्ता गुरु गोविंद सिंह पथ होते हुए आगे बढ़े। पूरे रास्ते कार्यकर्ता चुनाव आयोग की कथित धांधली के खिलाफ जोरदार नारे लगाते रहे। यह मार्च शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए अंततः शहीद भगत सिंह चौक पर पहुंचा, जहां यह एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया।
पुतला दहन कर आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
शहीद भगत सिंह चौक पर पहुंचने के बाद भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। इसके बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान में चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता खो चुका है, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने आयोग के रवैये पर अपना तीखा विरोध दर्ज कराया।
इस्तीफे व गिरफ्तारी की उठी पुरजोर मांग
सभा में वक्ताओं ने बिहार व देशभर में हुए चुनावों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इन्हें पूरी तरह रद्द करने की मांग की। प्रदर्शन का सबसे प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का रहा। नेताओं ने आरोप लगाया कि देश भर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम जानबूझकर सूची से हटा दिए गए हैं, जिन्हें अविलंब दोबारा जोड़ा जाना चाहिए। इसके साथ ही, चुनाव आयुक्तों की बहाली करने वाली चयन कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग उठाई गई। सभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की पुरजोर मांग की गई। इस प्रतिरोध मार्च और सभा में पार्टी के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। मुख्य रूप से सुरेश प्रसाद, शंभू नाथ मेहता, मुजफ्फर आलम, राजेश कुशवाहा, राखी मेहता, ललन यादव, श्रवण सिंहा, बजरंगी प्रसाद, उमेश पासवान, गोरख मेहता, मिंटू पासवान, आत्माराम, उमा यादव, महेंद्र प्रसाद यादव, किरण देवी, निर्मला देवी, गोपाल वर्मा, नागेंद्र सिंहा, विनोद प्रसाद, सुरेंद्र पासवान, टुनटुन पासवान, भूषण यादव, मुनरिक चौधरी, राजकुमार चौधरी, रंजीत यादव, राजेश कुमार, मनोज कुमार, मिथिलेश सिंह और सोमनाथ यादव समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।



