
पटना । जन सुराज अभियान के सूत्रधार और जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मुश्किलें अब बढ़ती नजर आ रही हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर की गई उनकी एक कथित विवादित टिप्पणी ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस मामले में प्रशांत किशोर के खिलाफ राजधानी पटना के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें उनके ऊपर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। इस शिकायत के सामने आने के बाद जन सुराज और सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रवीण कुमार नामक एक नागरिक ने पटना के साइबर पुलिस स्टेशन में यह लिखित शिकायत दी है। शिकायतकर्ता ने सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो क्लिप का हवाला दिया है, जिसमें प्रशांत किशोर कथित तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गोली मारने जैसी बातें कहते सुने जा रहे हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि एक प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक मंच से दिए गए ऐसे भड़काऊ बयान से राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और समाज में अशांति फैलने की आशंका है। इसी आधार पर पुलिस से तुरंत एफआईआर दर्ज करने की गुहार लगाई गई है।
प्रशांत किशोर ने दी सफाई, कहा- ‘संदर्भ से हटाकर पेश किया गया बयान’
इस बढ़ते बवाल के बीच, हाल ही में नालंदा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर और संदर्भ से पूरी तरह अलग करके पेश किया जा रहा है। पीके ने स्पष्ट किया कि वह राज्य में हो रही कथित ‘न्यायेतर हत्याओं’ (एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग) का वैचारिक विरोध कर रहे थे।उन्होंने तर्क दिया था कि यदि सत्ताधारी नेताओं, स्थानीय सांसद या विधायक की महज एक शिकायत के आधार पर किसी भी आम व्यक्ति को अपराधी मानकर उस पर गोली चलाने की कार्रवाई की जा सकती है, तो न्याय का यही पैमाना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी लागू क्यों नहीं होना चाहिए? इसी क्रम में पीके ने सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता और उनके कथित आपराधिक इतिहास पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने केवल सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की है और उनका नाम अतीत में सात लोगों की हत्या के एक संगीन मामले में भी सामने आ चुका है।
अब पुलिस की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं निगाहें
फिलहाल, इस पूरे प्रकरण से पटना का सियासी माहौल पूरी तरह से गर्म है। सबकी निगाहें अब पटना पुलिस और साइबर सेल के अगले कदम पर टिकी हैं। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायत मिलना और विधिवत एफआईआर दर्ज होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि साइबर थाना पुलिस वायरल वीडियो और शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद प्रशांत किशोर के खिलाफ क्या कदम उठाती है। बहरहाल, आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इस विवाद ने राज्य की राजनीति में एक नया और तल्ख अध्याय जरूर जोड़ दिया है।



