
पटना। बिहार में गंडक नदी के विकराल रूप और तटबंधों के टूटने से आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा रखी है। जलप्रलय जैसे हालात के बीच जब कई गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया और लोगों तक जमीनी मदद पहुंचना नामुमकिन लगने लगा, तब भारतीय वायुसेना (IAF) संकटमोचक बनकर आसमान से उतरी। बाढ़ के इस भयंकर कहर के बीच वायुसेना ने मोर्चा संभालते हुए प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की गड़गड़ाहट ने बाढ़ में फंसे निराश लोगों के दिलों में एक बार फिर जीवन की आस जगा दी है।जानकारी के अनुसार, मध्य वायु कमान के हेलीकॉप्टरों को दो अक्टूबर को बेहद अल्प सूचना (शॉर्ट नोटिस) पर राहत अभियान के लिए तैनात किया गया। पटना बेस से संचालित इस विशेष राहत मुहिम के तहत वायुसेना के जांबाज पायलटों ने दिनभर लगातार कई उड़ानें भरीं। गंडक नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ने के कारण सारण जिले के हालात सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए थे। यहां पानी के तेज बहाव और भारी जलजमाव के कारण नागरिक प्रशासन की नावें और अन्य राहत वाहन अंदरूनी इलाकों तक नहीं पहुंच पा रहे थे। ऐसे में वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने आसमान से ही कमान संभाली और बाढ़ पीड़ितों के लिए संजीवनी पहुंचाई।
वायुसेना ने गिराई 10 टन राहत सामग्री
वायुसेना के जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना सारण जिले के सर्वाधिक प्रभावित और दुर्गम इलाकों में सटीक तरीके से राहत सामग्री गिराई। चकिया, पृथ्वीपुर, सतजोड़ा, करचोलिया और मकेर जैसे दर्जनों गांव, जो पूरी तरह से टापू में तब्दील हो चुके हैं, वहां करीब 10 टन आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई गई। इस राहत खेप में सूखा राशन, दवाइयां, पीने का शुद्ध पानी और तिरपाल जैसी अन्य जरूरी चीजें शामिल थीं। चारों तरफ पानी से घिरे इन क्षेत्रों में फंसे बेबस परिवारों के लिए यह सामग्री किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई। आसमान से राहत सामग्री पहुंचते देख ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली।
बाढ़ से घिरे सारण में वायुसेना बनी संकटमोचक
इस चुनौतीपूर्ण अभियान की राह इतनी आसान नहीं थी। मौसम की तल्खी, तेज हवाओं, मुश्किल भूभाग और लगातार बदलती विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वायुसेना के दल ने अपने अदम्य साहस और पेशेवर दक्षता का बेहतरीन परिचय दिया। पायलटों ने बाढ़ के पानी से घिरे छोटे-छोटे सुरक्षित स्थानों को चिन्हित कर वहां बेहद सावधानी से सामग्री ड्रॉप की, जिससे स्थानीय प्रशासन के आपदा प्रबंधन कार्य को एक नई और मजबूत गति मिली।भारतीय वायुसेना ने अपनी इस त्वरित कार्रवाई से एक बार फिर यह कड़ा संदेश दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के समय नागरिक प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस मानवीय सहायता अभियान ने वायुसेना के मूल मंत्र “तत्परता से प्रतिक्रिया, सेवा के लिए प्रतिबद्ध—राष्ट्र सर्वोपरि” को पूरी तरह चरितार्थ किया है।



