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बिहार शिक्षक भर्ती में बड़ा पेंच: 20 हजार पदों का एलान, फिर भी छात्रों ने क्यों मांगा मंत्री का इस्तीफा?

पटना। बिहार में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों और कार्यरत शिक्षकों के लिए हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने चौथे चरण की शिक्षक भर्ती (TRE-4) के तहत 20 हजार से अधिक पदों पर बहाली और 29 जुलाई से ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया शुरू करने का एलान किया है, वहीं दूसरी ओर छात्र संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्र नेता दिलीप ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 31 जुलाई तक TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ, तो शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया है कि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से होने वाली चौथे चरण की शिक्षक भर्ती में 20 हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति की जाएगी। वर्तमान में विभिन्न जिलों से रिक्तियों का अंतिम ब्योरा जुटाया जा रहा है। जुलाई के अंत तक अधियाचना बीपीएससी को भेज दी जाएगी, जिसके बाद आयोग की ओर से आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। राज्य सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति करना है।

लंबे समय से अपने तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए राहत की खबर है। 29 जुलाई से नई स्थानांतरण व्यवस्था लागू हो रही है। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होगी। तबादले के लिए 100 अंकों का प्राथमिकता आधारित मूल्यांकन सिस्टम तैयार किया गया है। इसमें सेवा अवधि, महिला शिक्षकों से जुड़े विशेष प्रावधान, दिव्यांगता और गंभीर बीमारी जैसे मानकों के आधार पर अंक निर्धारित किए जाएंगे। शिक्षा विभाग का दावा है कि इस नई व्यवस्था से तबादला प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और विवादरहित हो जाएगी।भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी से शिक्षक अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। छात्र नेता दिलीप ने कड़े तेवर दिखाते हुए शिक्षा मंत्री को 31 जुलाई तक का समय दिया है। उन्होंने कहा, “शिक्षा मंत्री ने विधानसभा के पटल पर भी आश्वासन दिया था कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

यदि वे अपने वादे पर खरे नहीं उतरते हैं, तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।” छात्र नेता ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में केवल घोषणाएं हुई हैं, लेकिन समयसीमा का पालन किसी ने नहीं किया।प्राथमिक विद्यालयों में रिक्तियां कम होने के सरकारी संकेतों पर भी छात्र संगठनों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। दिलीप ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ भर्ती चरणों में पदों की संख्या लगातार घटाई गई है, जबकि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी अब भी बरकरार है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक, सभी स्तरों पर सम्मानजनक संख्या में रिक्तियां निकाली जाएं। यदि सरकार ने पर्याप्त पदों पर वास्तविक रिक्तियों के साथ जुलाई अंत तक विज्ञापन जारी नहीं किया, तो राज्यभर के लाखों शिक्षक अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।

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