
पटना के लोगों के लिए जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने वाली है। अब राजधानी में सड़क ही नहीं, बल्कि गंगा नदी के रास्ते भी आधुनिक और आरामदायक सफर का अनुभव मिलने जा रहा है। राज्य सरकार अगस्त महीने से वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी में जुटी है। इस परियोजना का अधिकांश काम पूरा हो चुका है और बाकी कार्य भी तेजी से अंतिम चरण में पहुंच रहा है।
पहले चरण में यह वाटर मेट्रो दीघा घाट से पटना सिटी के कंगन घाट तक चलेगी। इससे गंगा के दोनों किनारों के बीच यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक हो जाएगी।
वाटर मेट्रो के संचालन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। गांधी घाट पर चार्जिंग स्टेशन और आवश्यक विद्युत व्यवस्था तैयार कर ली गई है। वहीं दीघा घाट, गांधी घाट और कंगन घाट पर यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक टिकट काउंटर बनाए जा रहे हैं, ताकि सफर पूरी तरह व्यवस्थित और सुगम हो सके।
इस आधुनिक इलेक्ट्रिक वाटर मेट्रो की क्षमता भी काफी खास होगी। करीब 42 मीटर लंबे इस जहाज में एक साथ 75 यात्री सफर कर सकेंगे। इनमें 50 यात्रियों के बैठने और 25 यात्रियों के खड़े होकर यात्रा करने की व्यवस्था होगी। जहाज के अंदर बड़ा एयर कंडीशंड हॉल, एलसीडी डिस्प्ले, साउंड सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, डिजिटल सूचना प्रणाली और सुरक्षा के आधुनिक इंतजाम किए जाएंगे, जिससे यात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।
इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत इसका शानदार व्यू होगा। बड़ी-बड़ी ग्लास विंडो के जरिए यात्री गंगा नदी की खूबसूरती, ऐतिहासिक घाटों का नजारा और शाम की गंगा आरती का मनमोहक दृश्य देखते हुए सफर का आनंद उठा सकेंगे। यही वजह है कि यह सेवा सिर्फ आम यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यटकों के लिए भी बड़ा आकर्षण बनने वाली है।
यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक तकनीक पर आधारित होगी। इसमें लगी शक्तिशाली बैटरियां केवल 30 मिनट में चार्ज हो जाएंगी और एक बार चार्ज होने के बाद यह वाटर मेट्रो करीब डेढ़ घंटे तक लगातार संचालित हो सकेगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होगी।
सरकार की योजना भविष्य में इस सेवा का और विस्तार करने की है। दूसरे चरण में वाटर मेट्रो को दानापुर के नासरीगंज, कोनहारा घाट, सोनपुर, हरिहरनाथ और पानापुर तक चलाने की तैयारी है। इससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच जलमार्ग से आवागमन और भी तेज, आसान और सुविधाजनक हो जाएगा।



