
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान देशभर के 108 कलाकारों को उनकी कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें बिहार की तीन प्रमुख कला हस्तियों ने भी अपनी जगह बनाई।
कला के क्षेत्र में कई दशकों तक लगातार योगदान देने वाले इन कलाकारों को ताम्रपत्र, प्रशस्ति पत्र और एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई। समारोह में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा और संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
मैथिली रंगमंच के दिग्गज शिव नारायण झा ‘कुणाल’
बिहार से सम्मान पाने वालों में मैथिली रंगमंच के वरिष्ठ कलाकार शिव नारायण झा ‘कुणाल’ का नाम शामिल है। उन्होंने मैथिली नाटकों में नए प्रयोग करने के साथ पारंपरिक कीर्तनिया नाट्य शैली को आधुनिक रंगमंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कई दशकों से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय शिव नारायण झा ने मैथिली थिएटर को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
अभिनेता-निर्देशक सुरेश हज्जू को भी सम्मान
पटना के प्रसिद्ध अभिनेता और निर्देशक सुरेश हज्जू को भी संगीत नाटक अकादमी सम्मान से नवाजा गया। उन्होंने निर्माण कला मंच और विशाल नाट्य मंच जैसी संस्थाओं के माध्यम से रंगमंच को समृद्ध किया।
‘बिदेसिया का बटोही’ और ‘बकरी’ में दुर्जन सिंह जैसे किरदारों को प्रभावी ढंग से निभाकर उन्होंने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई है। मैथिली रंगमंच में नए प्रयोग और पारंपरिक नाट्य शैली को लोकप्रिय बनाने के लिए भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।
राष्ट्रपति ने मंच पर की खास बातचीत
सुरेश हज्जू के सम्मान का पल समारोह में बेहद भावुक और यादगार बन गया। जब वह पुरस्कार लेने मंच पर पहुंचे तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें देखकर मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या वह गांधी जी का किरदार निभाते हैं।
हज्जू के हां कहने पर राष्ट्रपति ने खुशी जाहिर की और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से उनका परिचय कराया। जब अभिनेता ने पूछा कि उन्हें उनके अभिनय के बारे में कैसे जानकारी मिली, तो राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने उनके अभिनय का वीडियो देखा था।
राष्ट्रपति की इस आत्मीय प्रतिक्रिया से सुरेश हज्जू काफी भावुक हुए और उन्होंने आगे भी पूरी निष्ठा के साथ अपनी कला यात्रा जारी रखने का संकल्प लिया।
गुरु महेंद्र राम ने बचाई ‘रसनचौकी’ की परंपरा
बिहार के मधुबनी जिले के वरिष्ठ कलाकार गुरु महेंद्र राम को भी इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। वह पिछले करीब 55 वर्षों से मिथिला की पारंपरिक लोक वाद्य शैली ‘रसनचौकी’ के संरक्षण और संवर्धन में जुटे हैं।
उनके लंबे योगदान ने मिथिला की इस पारंपरिक लोक वादन शैली को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गया के पंडित कृष्ण मोहन पाठक को भी संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
बिहार की कला प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर एक और पहचान गया जिले के ईश्वरपुर गांव के पंडित कृष्ण मोहन पाठक के सम्मान से मिली। संगीतकारों के गांव के रूप में पहचान रखने वाले ईश्वरपुर के रहने वाले कृष्ण मोहन पाठक को भी संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा कलाकारों को मिले इस सम्मान से बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर पहचान मिली है। मैथिली रंगमंच से लेकर पारंपरिक लोक वादन और संगीत तक, बिहार के कलाकारों के दशकों लंबे योगदान को इस समारोह में सम्मानित किया गया।



