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वीडियो बनाओ और इनाम पाओ, श्रावणी मेला पर बिहार सरकार का बड़ा ऐलान

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए बिहार सरकार ने एक अनोखी पहल शुरू की है। पर्यटन विभाग ने “एक इंफ्लुएंसर की नजर से” अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत देशभर के कंटेंट क्रिएटर्स, ट्रैवल व्लॉगर्स, फोटोग्राफर्स, वीडियोग्राफर्स और रील मेकर्स को श्रावणी मेले की भव्यता और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।

डिजिटल क्रिएटर्स के लिए सुनहरा मौका

पर्यटन विभाग का उद्देश्य सोशल मीडिया की ताकत के जरिए श्रावणी मेले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। इसी सोच के साथ सभी रचनात्मक कंटेंट क्रिएटर्स को इस अभियान में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आकर्षक और प्रभावशाली कंटेंट मेले को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिला सकता है।

मेले की आस्था और संस्कृति को करें कैमरे में कैद

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से अपील की गई है कि वे कांवड़ यात्रा, बाबा बैद्यनाथ धाम, धार्मिक परंपराएं, सेवा शिविर, लोक संस्कृति, प्राकृतिक दृश्य और श्रद्धालुओं की आस्था को अपने वीडियो, फोटो और रील्स के माध्यम से रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत करें। बेहतरीन कंटेंट तैयार करने वालों को आकर्षक नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।

विजेताओं को मिलेंगे लाखों रुपये के पुरस्कार

प्रतियोगिता के लिए पुरस्कार राशि भी तय की गई है।

प्रथम पुरस्कार: ₹3 लाख
द्वितीय पुरस्कार: ₹2 लाख
तृतीय पुरस्कार: ₹1 लाख
चतुर्थ पुरस्कार: दो प्रतिभागियों को ₹50-50 हजार
प्रशंसा पुरस्कार: पांच प्रतिभागियों को ₹25-25 हजार

बांका जिले के क्रिएटर्स को मिलेगा बड़ा फायदा

इस पहल से सबसे अधिक लाभ बांका जिले के स्थानीय कंटेंट क्रिएटर्स और युवाओं को मिलने की उम्मीद है। सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा का लगभग 55 किलोमीटर हिस्सा बांका जिले से होकर गुजरता है। अमरपुर, शंभूगंज, कटोरिया, बेलहर और चांदन जैसे क्षेत्रों में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जहां की प्राकृतिक छटा, सेवा शिविर और “हर-हर महादेव” के जयघोष मेले की खास पहचान हैं।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि श्रावणी मेले से जुड़े वीडियो और रील्स बड़े स्तर पर सोशल मीडिया पर पहुंचते हैं, तो धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। इसका सीधा लाभ होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, छोटे व्यापारियों और स्थानीय रोजगार पर भी पड़ेगा।

सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी वैश्विक पहचान

बिहार सरकार की यह पहल केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की कोशिश है। आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया के माध्यम से श्रावणी मेले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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