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बिहार में बड़ा प्रशासनिक उलटफेर: नीतीश युग के कद्दावर अधिकारी दीपक कुमार की सीएमओ से विदाई, अब संभालेंगे आपदा प्रबंधन

पटना। बिहार के प्रशासनिक महकमे में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। लंबे समय तक राज्य की ब्यूरोक्रेसी की धुरी रहे और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले 1984 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दीपक कुमार की मुख्यमंत्री सचिवालय (सीएमओ) से विदाई हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार ने उन्हें सीएम के प्रधान सचिव पद से हटाकर अब बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (बीएसडीएमए) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। इस नई जिम्मेदारी में पदभार ग्रहण करने की तिथि से उन्हें कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा प्राप्त होगा। इस बड़े कदम को नई सरकार द्वारा अपने अनुसार प्रशासनिक ढांचा तैयार करने के स्पष्ट संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।सत्ता के गलियारों में इस बड़े फेरबदल की खासी चर्चा है। दरअसल, दीपक कुमार का सीएमओ से हटना महज़ एक सामान्य तबादला नहीं है, बल्कि इसे सचिवालय से ‘नीतीश युग’ के अंतिम प्रभावशाली अधिकारी की विदाई के रूप में देखा जा रहा है। 31 मई 2018 को राज्य के मुख्य सचिव का पदभार संभालने वाले दीपक कुमार को सेवानिवृत्ति के बाद भी सीएमओ में अहम जिम्मेदारी मिली थी। उनकी प्रशासनिक पकड़ इतनी मजबूत थी कि सरकारें बदलने के बावजूद उनका रसूख कायम रहा। अब सम्राट चौधरी ने उन्हें हटाकर यह संदेश दे दिया है कि नई सरकार अपनी टीम और नई कार्यशैली के साथ ही आगे बढ़ेगी।

सत्ता बदली, सिस्टम बदला

दीपक कुमार को यह नई जिम्मेदारी भी काफी चुनौतीपूर्ण माहौल में मिली है। उन्हें आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कमान ऐसे नाज़ुक वक्त में सौंपी गई है, जब राज्य के कई हिस्से भीषण बाढ़ की चपेट में हैं और प्रशासन के सामने भारी चुनौतियां हैं। प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं। बीते सितंबर माह में पूर्व उपाध्यक्ष उदय कांत मिश्रा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से यह पद खाली पड़ा था। अब दीपक कुमार के नेतृत्व में बाढ़ राहत कार्यों और आपदा की पूर्व तैयारियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बिहार ब्यूरोक्रेसी में भारी उलटफेर

उनका प्रशासनिक अनुभव काफी विस्तृत रहा है। वे हजारीबाग, बक्सर, नालंदा और मोतिहारी के जिलाधिकारी रह चुके हैं। इसके अलावा, केंद्र में ईएसआईसी के महानिदेशक और एनएचएआई के चेयरमैन जैसे अहम पदों को भी सुशोभित कर चुके हैं। कुल मिलाकर, दीपक कुमार की सीएमओ से विदाई ब्यूरोक्रेसी में बड़े बदलाव का परिचायक है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उनका यह व्यापक अनुभव बिहार को प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में कितनी मजबूती प्रदान करता है।

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