
बिहार के ऊर्जा क्षेत्र को जल्द ही एक बड़ी सौगात मिल सकती है। बरौनी थर्मल पावर स्टेशन में 800 मेगावाट क्षमता की नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक आधारित बिजली उत्पादन इकाई स्थापित करने की तैयारी चल रही है। फिलहाल इस परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। ऊर्जा मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य को गति दी जाएगी।
जानकारी के अनुसार, इस नई यूनिट के लिए जमीन की कोई समस्या नहीं है। जिस स्थान पर परियोजना प्रस्तावित है, वहां पहले से बंद पड़ी पुरानी थर्मल यूनिट की भूमि का उपयोग किया जाएगा। इससे नई परियोजना को लागू करने में अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इस परियोजना के साथ एक आधुनिक बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। इसके जरिए अतिरिक्त बिजली को स्टोर किया जाएगा, ताकि जरूरत के समय यानी पीक आवर में उसका उपयोग किया जा सके। बिहार में एनटीपीसी पहली बार इस तरह की बैटरी स्टोरेज तकनीक पर काम करने जा रही है।
नई अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी अधिक दक्षता है। इस तकनीक से बिजली उत्पादन के दौरान कोयले की खपत पारंपरिक संयंत्रों की तुलना में लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक कम होगी। इससे उत्पादन लागत घटेगी और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम होगा, वहीं पानी की खपत में भी कमी आएगी।
खबरें ये भी हैं कि भविष्य में भागलपुर के कहलगांव और मुजफ्फरपुर के कांटी थर्मल पावर स्टेशन में भी 800 मेगावाट क्षमता वाली ऐसी ही अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल यूनिट लगाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इन परियोजनाओं पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। कहलगांव में तीसरे चरण के तहत प्रस्तावित यूनिट के लिए साइट सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है और वहां भी पर्याप्त जमीन उपलब्ध है।
फिलहाल बिहार में एनटीपीसी की छह थर्मल पावर यूनिट संचालित हैं, जिनकी कुल स्थापित वाणिज्यिक क्षमता करीब 9500 मेगावाट है। ये इकाइयां बाढ़, नवीनगर (औरंगाबाद), बरौनी, कांटी और कहलगांव में स्थित हैं।
यदि बरौनी की यह नई परियोजना मंजूरी पाती है, तो इससे बिहार की बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही राज्य को आधुनिक, ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बिजली उत्पादन तकनीक का भी बड़ा लाभ मिलेगा।



