
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत के अमेरिका में दिए गए हालिया बयान का बिहार के भागलपुर स्थित खानकाह पीर दमड़िया शाह के सज्जादानशीन सैयद शाह फखरे आलम हसन ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख का यह विचार देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देता है।
सैयद शाह फखरे आलम हसन ने विशेष रूप से मोहन भागवत के उस कथन को सकारात्मक बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “जो व्यक्ति चाहता है कि हिंदुस्तान में मुसलमान न रहें, संभव है कि वह हिंदू ही न हो।” उन्होंने कहा कि इस तरह का विचार समाज में आपसी विश्वास, भाईचारे और सद्भाव को बढ़ावा देता है।
मानवता को सबसे ऊपर रखने की जरूरत
सज्जादानशीन ने कहा कि पूरी मानव जाति एक ही माता-पिता की संतान है। इस्लाम भी इंसानों को हजरत आदम और हजरत हव्वा की संतान मानता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के तमाम लोगों का सृष्टिकर्ता और पालनहार एक है तथा धर्म की मूल भावना भी इंसान को पूरी मानवता के साथ प्रेम, करुणा और भाईचारे का व्यवहार करने की शिक्षा देती है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान या श्रेष्ठता उसकी जाति, धर्म, नस्ल, भाषा या क्षेत्र से तय नहीं होनी चाहिए। इंसान की वास्तविक पहचान उसके व्यवहार, चरित्र और दूसरों के प्रति उसके मानवीय दृष्टिकोण से होती है।
जाति और धर्म के आधार पर श्रेष्ठता का दावा गलत
सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि धन, परिवार, वंश, सामाजिक प्रतिष्ठा या धार्मिक पहचान के आधार पर किसी को स्वयं को दूसरे से बेहतर समझना उचित नहीं है। उनके अनुसार समाज में सम्मान का वास्तविक आधार अच्छा आचरण, मानवता और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्म का उद्देश्य लोगों के बीच दीवार खड़ी करना नहीं, बल्कि इंसानों के दिलों को जोड़ना और समाज में शांति एवं सद्भाव स्थापित करना है।
नेतृत्व से प्रेम और सद्भाव का संदेश देने की अपील
सज्जादानशीन ने प्रधानमंत्री, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं, धर्माचार्यों, उलेमा और समाज के अन्य प्रभावशाली लोगों से अपील की कि वे लगातार जनता के बीच प्रेम, करुणा, भाईचारे और पारस्परिक सम्मान का संदेश पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक शांति और मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए यह जरूरी है कि सभी समुदाय एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें और मिल-जुलकर आगे बढ़ें।
विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी ताकत
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और उस विविधता के बीच कायम एकता से है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन सहित सभी समुदायों की समान भागीदारी से ही देश विकास और प्रगति के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ सकता है।
सैयद शाह फखरे आलम हसन ने उम्मीद जताई कि मोहन भागवत अपने इस संदेश पर कायम रहेंगे और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी प्रेम, विश्वास तथा भाईचारे को बढ़ाने के प्रयासों को आगे भी जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा कि भारत के भविष्य की नींव नफरत और भेदभाव पर नहीं, बल्कि प्रेम, समानता और आपसी सम्मान पर मजबूत होगी। यही भावना देश को सामाजिक रूप से मजबूत और विश्व पटल पर अधिक प्रभावशाली बनाने में मदद करेगी।



