
पटना। बिहार में मछली के शौकीनों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। अब उन्हें अपनी पसंदीदा मछली खरीदने के लिए गंदगी और बदबूदार बाजारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने प्रदेश में डेयरी उत्पादों की बिक्री करने वाले ‘सुधा बूथ’ की तर्ज पर अत्याधुनिक और स्वच्छ ‘फ्रेश कैच कियोस्क’ खोलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इन आधुनिक बिक्री केंद्रों पर उपभोक्ताओं को पूरी तरह से साफ-सुथरे और हाइजेनिक माहौल में ताजी मछलियां उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पूरे बिहार में कुल 100 कियोस्क स्थापित किए जाएंगे, जिन पर 10.56 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
दो चरणों में धरातल पर उतरेगी योजना
यह महत्वपूर्ण योजना दो चरणों में लागू की जा रही है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रथम चरण के तहत 30 कियोस्क के निर्माण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, जिन्हें जल्द ही जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। वहीं, सफलता के आधार पर दूसरे चरण में 70 और कियोस्क स्थापित किए जाएंगे। योजना के शुरुआती चरण में राजधानी पटना सहित राज्य के 13 प्रमुख शहरों का चयन किया गया है। इनमें पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, बेगूसराय, मोतिहारी, बेतिया, हाजीपुर, किशनगंज, कटिहार और मुंगेर शामिल हैं। इन कियोस्क के निर्माण के लिए सरकारी जमीन, नगर निकायों या फिर जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि का उपयोग किया जा रहा है। इसका पूरा क्रियान्वयन मत्स्य निदेशालय और ‘बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड’ के साझा प्रयासों से किया जा रहा है।
कोल्ड चेन, डिस्प्ले काउंटर सहित मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
पारंपरिक मछली बाजारों की सबसे बड़ी समस्या वहां पसरी गंदगी होती है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए इन कियोस्क को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। मछली की ताजगी लंबे समय तक बरकरार रखने के लिए यहां कोल्ड चेन, डीप फ्रीजर और आकर्षक डिस्प्ले काउंटर मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, स्वच्छ पेयजल, सुदृढ़ जल निकासी (ड्रेनेज) प्रणाली, 24 घंटे बिजली और पावर बैकअप की पुख्ता व्यवस्था भी होगी। ग्राहकों की सुविधा के लिए डिजिटल भुगतान (यूपीआई) का विकल्प रहेगा। अपशिष्ट प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) की वैज्ञानिक व्यवस्था भी होगी, ताकि कचरे का सही निपटान हो सके। ‘सात निश्चय-3’ के तहत प्रस्तावित इस योजना पर अधिकतम 10.56 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन है। विभाग ने एक कियोस्क की निर्धारित इकाई लागत 11 लाख रुपये तय की है, जिसे संभावित महंगाई को देखते हुए अधिकतम 13.20 लाख रुपये तक आंका गया है। सरकार निर्धारित लागत का 80 प्रतिशत या वास्तविक निर्माण लागत (जो भी कम हो) का अनुदान के रूप में वहन करेगी। कियोस्क निर्माण के लिए निविदा (टेंडर) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से एजेंसियों का चयन किया जाएगा। सुचारू संचालन के लिए कड़ी शर्तों के आधार पर संचालकों की नियुक्ति होगी, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। फिलहाल बिहार के कई शहरी इलाकों में मछली की बिक्री असंगठित तरीके से होती है। खुले में बिक्री होने से स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखने में परेशानी आती है। सरकार इन कियोस्क के जरिए एक व्यवस्थित बाजार तैयार कर रही है। इससे राज्य के मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और मत्स्य सहकारी समितियों को अपने उत्पाद सीधे बाजार तक पहुंचाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। बिचौलियों की भूमिका खत्म होने से किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा और बिहार के मत्स्य पालन क्षेत्र को एक नई गति मिलेगी।



