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नेपाल से गंडक में छोड़ा गया 3.5 लाख क्यूसेक पानी, गोपालगंज से बगहा तक मंडराया बाढ़ का खतरा

पटना। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद उत्तर बिहार पर एक बार फिर बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। शनिवार को वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से इस साल पहली बार एक साथ करीब 3.5 लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया है। इतनी भारी मात्रा में डिस्चार्ज के कारण गंडक नदी उफान पर आ गई है। इसे देखते हुए पश्चिमी चंपारण (बगहा) से लेकर गोपालगंज तक हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। बगहा के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है, जिसके बाद प्रशासन युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुट गया है। पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा में गंडक का रौद्र रूप दिखना शुरू हो गया है। जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण भेड़िहारी गांव के बंगाली कॉलोनी और रोहुआ टोला के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को बगहा एसडीएम चांदनी कुमारी, अपर समाहर्ता (पश्चिमी चंपारण), अंचल अधिकारी वसीम अकरम और एसएसबी 65वीं बटालियन के कमांडेंट ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सघन निरीक्षण किया। वहीं, उप विकास आयुक्त काजले वैभव ने पीडी रिंग बांध का जायजा लिया और निचले इलाकों में रह रहे लोगों को तुरंत सुरक्षित व ऊंचे स्थानों पर जाने का निर्देश दिया। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को रेस्क्यू कर उच्च विद्यालय भेड़िहारी में बनाए गए राहत शिविर में विस्थापित किया है। शिविर में भोजन, पेयजल और मेडिकल कैंप की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

बगहा के गांवों में घुसा पानी, राहत शिविर चालू

नेपाल से छोड़ा गया यह पानी रविवार दोपहर तक गोपालगंज पहुंचने की प्रबल संभावना है। संभावित खतरे को देखते हुए गोपालगंज जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सदर अंचलाधिकारी (सीओ) रजत कुमार बरनवाल ने जादोपुर दुखहरण पंचायत सहित नदी किनारे बसे गांवों का दौरा किया। प्रशासन की टीमें लाउडस्पीकर (माइकिंग) के जरिए ग्रामीणों को जागरूक कर रही हैं कि वे अपने मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं।

गोपालगंज: तटबंध सुरक्षित, लेकिन प्रशासन मुस्तैद

एहतियात के तौर पर जिला प्रशासन ने गंडक नदी में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत नाविकों और आम लोगों के नदी में नाव लेकर उतरने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया है। सदर सीओ ने स्पष्ट किया है कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि जिले के तटबंध 6.5 से 7 लाख क्यूसेक तक पानी का दबाव सहने में पूरी तरह सक्षम हैं। फिर भी नदी किनारे कटाव की आशंका को देखते हुए तटबंधों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने भी अधिकारियों से वार्ता कर 24 घंटे अलर्ट रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने आम जनमानस से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और आपात स्थिति में तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित करें।

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