
पटना। राजधानी पटना में सोमवार का दिन भारी हंगामे और विरोध-प्रदर्शनों के नाम रहा। शहर की सड़कों पर एक साथ उठे दो बड़े आंदोलनों ने यातायात और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया। एक तरफ जहां किसान, मजदूर और वामपंथी दलों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गांधी मैदान से डाकबंगला चौराहे तक उग्र ‘आक्रोश मार्च’ निकाला, वहीं दूसरी ओर बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के छात्रों ने परीक्षा परिणामों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया। डाकबंगला चौराहे पर हालात बेकाबू होते देख पुलिस को सख्त रवैया अपनाना पड़ा और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। सोमवार सुबह गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से एआईएसएफ (AISF), सीपीआई (CPI), एआईकेएफ (AIKF) और अन्य वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने अपना मार्च शुरू किया। इनके हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर ‘बाढ़-सूखा का स्थायी निदान करो’, ‘वित्त रहित शिक्षा समाप्त करो’, ‘स्कीम वर्कर्स को स्थायी करो’ और रोजगार से जुड़े नारे लिखे थे। जब यह भीड़ जेपी गोलंबर होते हुए डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ी, तो वहां पहले से तैनात पुलिस बल ने लोहे के विशाल बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश के दौरान पुलिस के साथ उनकी भारी धक्का-मुक्की हुई। मौके पर मौजूद एसडीपीओ (SDPO) कामख्या नारायण सिंह के साथ कार्यकर्ताओं की तीखी बहस हुई, जिसके बाद पुलिस ने महिला और पुरुष समेत कई लोगों को खींचकर हिरासत में ले लिया।
कील लगे बांस पर हुआ भारी बवाल
प्रदर्शन के दौरान एक बेहद हैरान करने वाला वाकया सामने आया। एक महिला प्रदर्शनकारी बीच सड़क पर हाथ में कील लगा हुआ बांस लेकर घूमती नजर आई। महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि यह जानलेवा बांस उसने पुलिसकर्मियों के हाथ से छीना है। आक्रोशित महिला ने सवाल उठाया कि अगर यह कील लगा बांस किसी आंदोलनकारी को लग जाता, तो क्या होता? उसने चेतावनी दी कि वह इसे लेकर सीधे मुख्यमंत्री के पास जाएगी और पुलिस की इस कार्यशैली की शिकायत करेगी। इधर, शहर के दूसरे हिस्से में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के छात्रों ने जमकर बवाल काटा। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा परिणाम में जानबूझकर करीब 95 प्रतिशत विद्यार्थियों को फेल कर दिया है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है। छात्र परीक्षा परिणाम की तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा करने की मांग पर अड़े हैं। जानकारी के अनुसार, इस छात्र आंदोलन को समर्थन देने के लिए सांसद पप्पू यादव भी मौके पर पहुंचे। एक ही दिन में अलग-अलग मुद्दों पर हुए इन दो बड़े प्रदर्शनों को देखते हुए पटना पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई। पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा, सिटी एसपी (वेस्ट) संकेत कुमार और सिटी एसपी (ईस्ट) शैलजा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भारी दलबल के साथ सड़कों पर मुस्तैद रहे। शहर के प्रमुख मार्गों, विशेषकर डाकबंगला और जेपी गोलंबर के पास अतिरिक्त रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई। भारी हंगामे के चलते शहर की यातायात व्यवस्था कुछ समय के लिए बुरी तरह चरमरा गई, जिसे पुलिस प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद बहाल कराया।



