
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शराबबंदी कानून को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि शराबबंदी लागू होने से राज्य सरकार को राजस्व (कमाई) का नुकसान जरूर उठाना पड़ा है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि शराबबंदी के बाद प्रदेश में घरेलू हिंसा, अपराध और महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों में भारी कमी आई है। रविवार को पटना स्थित लोक भवन में आयोजित ‘नशामुक्त युवा पति विकसित भारत संकल्प अभियान’ के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि अगर भारत को विकसित और बिहार को समृद्ध बनाना है, तो युवाओं को नशे से पूरी तरह दूर रहना होगा। उन्होंने प्रदेश के युवाओं से नशामुक्त समाज के निर्माण में आगे बढ़कर सहयोग करने की अपील की। ‘उत्तर प्रदेश, दिल्ली व बंगाल को मिलता है भारी राजस्व’ शराबबंदी से होने वाले वित्तीय नुकसान का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्यों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया: उत्तर प्रदेश को शराब से लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है पश्चिम बंगाल को करीब 50 हजार करोड़ रुपये दिल्ली को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये। झारखंड को करीब 25 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने आर्थिक फायदे की चिंता किए बिना जनहित और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता दी। वर्ष 2016 में जब राज्य की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, तब भी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्ण शराबबंदी लागू करने का साहसिक निर्णय लिया था। आज 10 वर्षों बाद यह कानून बिहार की सामाजिक मजबूती का प्रतीक बन चुका है। ‘शराब पीने वाले अब देवघर और बंगाल का रुख कर रहे’ महिलाओं की स्थिति पर बात करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी की सबसे बड़ी मांग महिलाओं की ओर से ही आई थी। नशाबंदी के बाद से गांवों और शहरों में सामाजिक बदलाव साफ देखा जा सकता है।तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में पाबंदी के कारण अब कुछ लोग शराब पीने के लिए पड़ोसी राज्यों और धार्मिक स्थलों जैसे— देवघर, पश्चिम बंगाल, बनारस और सुल्तानगंज का रुख करने लगे हैं। हालांकि, धीरे-धीरे इन स्थितियों में भी सुधार आएगा और राज्य पूर्ण नशामुक्त बनेगा। युवाओं से अपील और विकास की चुनौतियाँ कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार को तबाह कर देता है। उन्होंने युवाओं से नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया।इसके अलावा, उन्होंने राज्य के सामने मौजूद दो प्रमुख चुनौतियों— नेपाल से आने वाले पानी (बाढ़) और विशाल आबादी पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की नीतीश सरकार मिलकर नेपाल के पानी की समस्या का स्थायी समाधान तलाश रही है, जबकि बिहार की विशाल कार्यशील आबादी अब राज्य की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है।



