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बागमती ने पार किया लाल निशान, पानी में डूबा NDRF कैंप; कटाव रोकने के लिए एक्शन मोड में अधिकारी

पटना। नेपाल के जल ग्रहण क्षेत्रों और इलाके में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बागमती नदी ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है। सोमवार को नदी के जलस्तर में अचानक आए उफान ने तटबंध के भीतर और निचले इलाकों में बसे लोगों की नींद उड़ा दी है। बागमती नदी के डुब्बाघाट स्थित गेज पर खतरे का निशान 61.28 मीटर निर्धारित है, लेकिन वर्तमान में नदी इस लाल निशान को पार करते हुए 61.33 मीटर पर बह रही है। यह इस सीजन में जलस्तर का सबसे उच्चतम रिकॉर्ड है। नदी की उफनती धाराओं का पानी तेजी से निचले इलाकों में फैल रहा है, जिससे तटबंध के आसपास बसे दर्जनों गांवों में बाढ़ की आशंका को लेकर दहशत का माहौल है।हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डुब्बा घाट पर बनाए गए एनडीआरएफ (NDRF) के कैंप में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। जलस्तर में वृद्धि और तेज बहाव के कारण डुब्बाघाट, पिपराही घाट, अदौरी घाट और मोतनाजे सहित कई इलाकों में जबरदस्त कटाव हो रहा है। किसानों की लहलहाती फसलें और खेत देखते ही देखते नदी की गोद में समा रहे हैं। पिपराही स्थित बागमती पुल के पिलर संख्या एक के पास भी कटाव का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे पुल के अलावा नदी के दोनों किनारों पर भी खतरा मंडराने लगा है।

वहीं, नदी का पानी बेलवा डैम के सहारे बेलवा-मीनापुर लिंक चैनल के रास्ते बेहद तेज गति से आगे की ओर बह रहा है।बाढ़ और कटाव के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी प्रतिभा रानी के निर्देश पर जिला प्रशासन और बागमती प्रमंडल की टीमें पूरी तरह से अलर्ट और एक्शन मोड में आ गई हैं। प्रशासन और बागमती प्रमंडल की टीमें 24 घंटे नदी के जलस्तर पर नजर रख रही हैं। कटाव वाले स्थानों पर बड़े-बड़े पत्थर और मिट्टी से भरे बोरे डालकर बाढ़ सुरक्षात्मक व तटबंध सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। जिलाधिकारी प्रतिभा रानी ने बताया कि पिपराही व डुब्बा पुल दोनों स्थानों पर हो रहे कटाव को रोकने के लिए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बढ़ते जलस्तर व बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं और किसी भी आपात परिस्थिति का सामना करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है।

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