
पटना। बिहार की राजनीति में विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है। इसी कड़ी में जन सुराज के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने जमुई में आयोजित ‘प्रबुद्ध संवाद’ कार्यक्रम के दौरान राज्य की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार पर जोरदार हमला बोला है। प्रशांत किशोर ने सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व और यहां तक कि निर्वाचन आयोग की कार्यशैली को भी अपने तीखे बयानों के निशाने पर लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि सत्ता के नशे में चूर भाजपा की सरकार अब पूरी तरह से बेलगाम और अहंकारी हो चुकी है। जमुई में प्रबुद्ध वर्ग को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने भाजपा पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल का अहंकार अब इस कदर बढ़ गया है कि वे खुद को सर्वशक्तिमान समझने लगे हैं। पीके ने कहा, “भाजपा वालों का अहंकार अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया है। अब तो स्थिति यह आ गई है कि वे दावा करने लगे हैं कि भगवान को भी मोदी जी ही घर दिलवा रहे हैं। यह अहंकार का वह स्तर है जहां जनता को जवाब देना जरूरी हो जाता है।” इसी क्रम में उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर भी बेहद तल्ख टिप्पणी की। प्रशांत किशोर ने जनता से सीधा आह्वान करते हुए कहा कि यदि बिहार की आवाम उन्हें (सम्राट चौधरी को) मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार नहीं करती है, तो इस एमएलसी चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार को हराकर अपना कड़ा संदेश दें।
‘भगवान को भी मोदी जी से घर दिलवा रहे हैं भाजपा के लोग’
प्रशांत किशोर ने पटना स्नातक और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में चल रहे चुनावी घमासान पर भी खुलकर बात की। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पटना स्नातक क्षेत्र में मुख्य मुकाबले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अनुज सिंह और नीरज कुमार के बीच कड़ी टक्कर है, लेकिन कई प्रभावशाली लोग अनुज सिंह के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं, जिनमें पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह का नाम भी शामिल है।पीके ने सबसे बड़ा सियासी दावा कोसी स्नातक क्षेत्र को लेकर किया। उन्होंने कहा कि इस सीट पर जदयू और भाजपा के कई असंतुष्ट नेता और कार्यकर्ता भीतर ही भीतर जन सुराज के उम्मीदवार की मदद कर रहे हैं। एनडीए में दरार की ओर इशारा करते हुए पीके ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “चुनाव प्रचार खत्म होने की कगार पर है, लेकिन यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब तक एनडीए के किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में समर्थन का एक शब्द नहीं बोला है।”
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर प्रश्न
कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रशांत किशोर ने संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका, विशेषकर चुनाव आयोग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए। हाल ही में राजनाथ सिंह द्वारा दिए गए बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पीके ने कहा कि अगर संवैधानिक संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से नहीं निभाएंगी, तो सड़क पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करना जनता की मजबूरी बन जाएगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल ज्ञानेश कुमार का मामला नहीं है, बल्कि पिछले आठ-दस वर्षों में चुनाव आयोग के काम करने के तरीके से बार-बार यह प्रतीत होता है कि आयोग सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाने का काम कर रहा है। इसके अलावा, उन्होंने एक बड़ा नीतिगत सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव रविवार के बजाय जानबूझकर शुक्रवार को कराए जा रहे हैं। पीके ने आरोप लगाया कि यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि मुस्लिम मतदाताओं की चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी को कम किया जा सके, जो लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत है।



