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बिहार में टेंडर घोटालों पर सरकार की बड़ी स्ट्राइक: 5 करोड़ से ऊपर के सभी ठेकों की होगी निगरानी जांच

पटना। बिहार में विकास कार्यों और टेंडर आवंटन में पूर्ण पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। सरकार ने जनवरी 2026 से लेकर अब तक आवंटित हुए पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक की भारी-भरकम लागत वाले सभी टेंडरों की सघन जांच कराने का बड़ा निर्णय लिया है। सरकार के इस अप्रत्याशित और कड़े फैसले से प्रशासनिक महकमे से लेकर बड़े ठेकेदारों और संवेदकों के बीच भारी हड़कंप मच गया है। पिछले नौ महीनों में जारी हुए सभी बड़े ठेके अब निगरानी के दायरे में आ गए हैं।

निगरानी विभाग को मिला जांच का जिम्मा

निविदा प्रक्रिया में होने वाली किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, धांधली, सिंडिकेट के प्रभाव या नियमों की अनदेखी को पकड़ने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सीधे निगरानी विभाग को सौंपी गई है। निगरानी विभाग के अधीन कार्य करने वाले ‘तकनीकी परीक्षक कोषांग’ (टेक्निकल एक्जामिनर सेल) के माध्यम से इन सभी निविदाओं की बारीकी से पड़ताल की जाएगी। सरकार के इस कड़े निर्णय के दायरे में राज्य के वे नौ प्रमुख विभाग आ रहे हैं, जहां सबसे अधिक आधारभूत संरचना के निर्माण और विकास कार्य होते हैं। इनमें स्वास्थ्य विभाग और अशोक चौधरी से संबंधित विभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा जिन विभागों की फाइलें खंगाली जाएंगी, उनमें नगर विकास एवं आवास विभाग, पथ निर्माण विभाग, पर्यटन विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, ऊर्जा विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी), भवन निर्माण विभाग और लघु जल संसाधन विभाग शामिल हैं। इन विभागों में करोड़ों का बजट खर्च होता है, इसलिए यहां पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षक कोषांग में तकनीकी विशेषज्ञता रखने वाले अत्यंत अनुभवी अभियंताओं की तैनाती की गई है। ये विशेषज्ञ निविदा प्रक्रिया और उससे जुड़े एक-एक दस्तावेज का गहन तकनीकी परीक्षण करेंगे। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर होगा कि पांच करोड़ या उससे अधिक के इन टेंडरों के आवंटन में किसी प्रकार की ‘टेंपरिंग’ (दस्तावेजों या ई-टेंडरिंग में छेड़छाड़) तो नहीं की गई है। इसके अलावा नियमों से विचलन (डेविएशन), वित्तीय अनियमितता या चहेते ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की बारीकी से पहचान की जाएगी।

विभागों से तलब की गई विस्तृत रिपोर्ट

जांच प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से शुरू करने के लिए निगरानी विभाग ने सभी संबंधित नौ विभागों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। विभागों से प्रत्येक निविदा के संबंध में विस्तृत जानकारी अविलंब उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस रिपोर्ट में निविदा आमंत्रण सूचना (एनआईटी) जारी करने की तिथि, कार्य का पूरा नाम, निविदा में अंकित प्राक्कलित (अनुमानित) राशि और टेंडर निपटारे की अद्यतन स्थिति अनिवार्य रूप से शामिल करनी होगी।निगरानी विभाग ने यह भी जानकारी मांगी है कि टेंडर का अंतिम परिणाम मूल प्राक्कलित बिल से कम है या अधिक। इसे प्रतिशत (परसेंटेज) में स्पष्ट रूप से बताने का निर्देश दिया गया है ताकि यह पता चल सके कि टेंडर तय रेट से कितने ऊंचे या नीचे दावों पर सेट किया गया है। इन्हीं महत्वपूर्ण जानकारियों के आधार पर तकनीकी परीक्षक कोषांग निष्पक्ष जांच करेगा। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि इस व्यापक जांच के बाद कई बड़े खुलासे हो सकते हैं और गड़बड़ी पाए जाने पर दोषी अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।

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