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पंचायत सचिवों की ट्रांसफर लिस्ट पर बड़ा सवाल, गैर-मौजूद कर्मियों के नाम से मचा हड़कंप

बिहार के पंचायती राज विभाग में पंचायत सचिवों के ट्रांसफर को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग की ओर से जारी ट्रांसफर सूची में ऐसे तीन लोगों के नाम शामिल कर दिए गए, जो संबंधित जिलों में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत ही नहीं थे। मामले की जानकारी सामने आने के बाद ट्रांसफर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

तीन नामों ने खड़े किए कई सवाल

विभाग की ट्रांसफर सूची में क्रमांक-1 पर सुजीत विश्वास, अररिया, क्रमांक-761 पर दीपक कुमार, नालंदा और क्रमांक-791 पर गणेश कुमार, नवादा का नाम दर्ज था।

बताया जा रहा है कि संबंधित तीनों जिलों के जिलाधिकारियों से कराई गई जांच में इन नामों का पंचायत सचिव के तौर पर कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब ये कर्मचारी संबंधित जिलों में पंचायत सचिव थे ही नहीं, तो उनके नाम आधिकारिक ट्रांसफर सूची में किस आधार पर शामिल किए गए।

1645 पंचायत सचिवों का हुआ ट्रांसफर

पंचायती राज विभाग में कुल 2248 पंचायत सचिवों में से 1645 कर्मचारियों का तबादला किया गया है। हालांकि, सूची तैयार करने की प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में है।

आरोप है कि ट्रांसफर सूची तैयार करने से पहले विभागीय रिकॉर्ड का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, तबादले में कर्मचारियों की वरीयता और दूरी से जुड़े नियमों का भी कथित तौर पर पालन नहीं किया गया।

मृत और निलंबित कर्मचारियों के नाम भी शामिल होने का आरोप

ट्रांसफर सूची को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक इसमें ऐसे पंचायत सचिवों के नाम भी शामिल होने की बात कही जा रही है, जो या तो नौकरी छोड़ चुके हैं, निलंबित हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है।

इन गड़बड़ियों के सामने आने के बाद पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड जांच को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

मंत्री ने कार्रवाई का दिया भरोसा

विभागीय मंत्री दीपक प्रकाश ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पंचायत सचिव संघ ने CM से जांच की मांग की

पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

संघ का आरोप है कि निजी फायदे और अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पिछली प्रक्रिया की तरह इस बार भी पिछले दरवाजे से नियुक्ति कराने की कोशिश की गई। हालांकि, यह कथित प्रयास समय रहते सामने आ गया।

संघ ने सरकार से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि गलत नाम ट्रांसफर सूची में शामिल करने के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई कब तक होगी।

पंचायतों के परिसीमन के बीच बढ़ी अहमियत

पंचायत सचिवों की भूमिका इस समय और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि बिहार में करीब 33 वर्षों बाद पंचायतों के नए सिरे से परिसीमन की प्रक्रिया होने वाली है। इस दौरान यह तय किया जाएगा कि कौन-सा राजस्व गांव किस पंचायत का हिस्सा रहेगा और किन गांवों को अलग किया जाएगा।

परिसीमन के बाद करीब एक वर्ष के भीतर राज्य में लगभग 13 हजार संभावित नई पंचायतों के चुनाव कराए जाने हैं। वर्तमान में बिहार के करीब 45 हजार गांवों को 8,053 पंचायतों में बांटा गया है।

ग्रामीण प्रशासन में पंचायत सचिवों की अहम भूमिका

पंचायत सचिवों के जिम्मे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य होते हैं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, वंशावली तैयार करने के साथ सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सत्यापन जैसे काम शामिल हैं।

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