
पटना। बिहार में एक तरफ नदियां उफान पर हैं और 15 जिलों में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचा रखी है, तो दूसरी तरफ इस प्राकृतिक आपदा के बीच सूबे का सियासी पारा भी उफान पर है। राहत और बचाव कार्यों के दावों के बीच राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। एक ओर जहां राज्य सरकार और प्रशासन बाढ़ प्रभावित परिवारों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने का दावा कर रहे हैं, वहीं विपक्ष ने सरकार पर पीड़ितों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार बाढ़ के मुद्दे पर राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। उनके निशाने पर सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं। तेजस्वी का आरोप है कि सरकार आपदा की इस घड़ी में संवेदनहीन बनी हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया और अपने बयानों के जरिए केंद्र से बिहार के लिए तत्काल और पर्याप्त विशेष आर्थिक मदद की पुरजोर मांग की है। विपक्ष का कहना है कि जब जनता बाढ़ के पानी में घिरी है, तब सरकारी मशीनरी केवल कागजी दावों में व्यस्त है।
तेजस्वी के निशाने पर केंद्र और राज्य सरकार
इस सियासी घमासान के बीच अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भी बिहार के हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक मार्मिक पोस्ट साझा करते हुए बाढ़ से हुई जनहानि पर गहरा दुख जताया।उन्होंने अपने संदेश में लिखा, “बिहार में आई विनाशकारी बाढ़ से हुई जनहानि अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। जिन परिवारों ने इस भयंकर त्रासदी में अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मेरी सहानुभूति इस आपदा से प्रभावित हर एक व्यक्ति के साथ है।” राहुल गांधी ने जमीनी स्तर पर मदद के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए तुरंत आगे आएं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने में सहयोग करें।
राहुल गांधी ने जताई संवेदना, कार्यकर्ताओं को दिया निर्देश
इसके साथ ही राहुल ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से भी राहत एवं बचाव कार्यों में पूरी तत्परता दिखाने की अपेक्षा जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावितों तक आवश्यक सहायता बिना किसी देरी के जल्द से जल्द पहुंचनी चाहिए।जैसे-जैसे बिहार में बाढ़ का दायरा बढ़ रहा है, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी तेज हो रही है। सत्ता पक्ष जहां राहत शिविरों और प्रशासन की मुस्तैदी के आंकड़े पेश कर रहा है, वहीं विपक्ष जमीनी हकीकत का हवाला देकर सरकारी दावों पर सवाल उठा रहा है। कुल मिलाकर, बिहार में बाढ़ अब केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं रह गई है, बल्कि यह एक बड़ा सियासी मुद्दा भी बन गई है।



