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बिहार MLC चुनाव में जन सुराज का शंखनाद, पटना से दरभंगा तक 5 धुरंधरों को उतारा मैदान में

पटना। बिहार के सियासी गलियारों में आगामी विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पारंपरिक राजनीतिक दलों की बिछी बिसात के बीच अब ‘जन सुराज’ ने भी अपनी दमदार एंट्री मार दी है। जन सुराज ने विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की पांच अहम सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इस रणनीतिक कदम से स्पष्ट हो गया है कि आगामी एमएलसी चुनाव में अब सीधा मुकाबला नहीं, बल्कि एक दिलचस्प और बहुकोणीय संघर्ष देखने को मिलेगा।जन सुराज द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, पार्टी ने क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी तय किए हैं। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एसपी राय को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रवींद्र यादव जन सुराज के प्रत्याशी होंगे। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अफाक अहमद और कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से रजनीश रंजन पर दांव खेला गया है। वहीं, राजधानी पटना की हॉट सीट मानी जाने वाली ‘पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र’ से महिला उम्मीदवार दिव्या ज्योति को मैदान में उतारकर पार्टी ने आधी आबादी को एक मजबूत राजनीतिक संदेश दिया है।

मिथिलांचल के दरभंगा पर विशेष फोकस

चुनावी दृष्टिकोण से देखें तो जन सुराज का सबसे ज्यादा जोर मिथिलांचल के महत्वपूर्ण केंद्र दरभंगा पर नजर आ रहा है। पार्टी ने यहां से शिक्षक और स्नातक, दोनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। दरभंगा क्षेत्र में राजनीतिक तापमान हमेशा ऊंचा रहता है और अब जन सुराज के प्रत्याशियों के उतरने से यहां का मुकाबला और भी कड़ा हो गया है। माना जा रहा है कि पार्टी यहां के प्रबुद्ध मतदाताओं के जरिए पूरे उत्तर बिहार में अपनी सांगठनिक जड़ों को गहरा करना चाहती है। पटना शिक्षक सीट से दिव्या ज्योति और सारण से अफाक अहमद को मौका देकर जन सुराज ने लैंगिक और अल्पसंख्यक समीकरणों को भी बारीकी से साधा है। अब तक इन सीटों पर मुख्य रूप से एनडीए और महागठबंधन का ही वर्चस्व रहा है, लेकिन जन सुराज की इस आक्रामक एंट्री ने दोनों प्रमुख खेमों के रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

एनडीए और महागठबंधन की बढ़ी चुनौती

अब जन सुराज के ये पांचों उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में सघन जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रहे हैं। प्रत्याशियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती व्यक्तिगत संपर्क और पंजीकृत मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाना होगी। बहरहाल, एमएलसी चुनाव की इस नई बिसात पर अब पूरे बिहार की नजरें टिक गई हैं। यह चुनाव तय करेगा कि राज्य का प्रबुद्ध मतदाता राजनीतिक बदलाव की इस नई बयार को किस हद तक स्वीकार करता है।

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