
डेस्क। उत्तर प्रदेश के गोंडा में विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने मिशन 2027 का शंखनाद कर दिया है। गुरुवार को आयोजित एक विशाल सामाजिक सम्मेलन और प्रेस वार्ता में उन्होंने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए ‘आरक्षण नहीं तो वोट नहीं’ का नारा बुलंद किया। सहनी ने निषाद समाज से एकजुट होने की अपील करते हुए दो टूक कहा कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आरक्षण लागू नहीं हुआ, तो समाज भाजपा का पूर्ण रूप से बहिष्कार करेगा।सम्मेलन का सबसे अहम और भावुक पल वह रहा, जब वीआईपी प्रमुख ने उपस्थित जनसैलाब के हाथों में गंगाजल देकर सामूहिक संकल्प दिलाया। उन्होंने लोगों से अपने पूर्वजों और धार्मिक आस्था को साक्षी मानकर यह कसम खाने को कहा कि जब तक निषाद समाज को उनका संवैधानिक हक नहीं मिल जाता, तब तक वे भाजपा को वोट नहीं देंगे और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए यह लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेंगे।सरकार की मुफ्त राशन योजना पर तंज कसते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि केवल पांच किलो अनाज देकर निषाद समाज को आत्मनिर्भर नहीं बनाया जा सकता।

समाज को अब खैरात नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा, आधुनिक अस्पताल, कल-कारखाने और रोजगार चाहिए। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) को मिले आरक्षण का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब आर्थिक आधार पर अन्य वर्गों को आरक्षण मिल सकता है, तो अत्यंत पिछड़े निषाद समाज को इस संवैधानिक अधिकार से क्यों वंचित रखा जा रहा है?सहनी ने समाज के लोगों को आगाह किया कि चुनाव के वक्त राजनीतिक दल पैसे और अन्य प्रलोभन देकर वोट हथियाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा, “चुनाव में बांटा जाने वाला पैसा जनता का ही है, लेकिन अपना कीमती वोट हमेशा अपने विवेक से दें।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की तर्ज पर यूपी में भी गरीब महिलाओं को बड़े-बड़े वादों और पैसों के जरिए बरगलाने की साजिश रची जा रही है, जिससे समाज को सतर्क रहना होगा।यह आंदोलन केवल गोंडा तक सीमित नहीं रहेगा। सहनी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे टोलियां बनाकर यूपी के हर गांव, घर और टोले तक पहुंचें। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करें और गंगाजल से संकल्प लेते हुए लोगों के वीडियो बनाकर प्रदेश कार्यालय भेजें। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में यह जन-आंदोलन और उग्र होगा तथा सरकार पर आरक्षण के लिए भारी लोकतांत्रिक दबाव बनाया जाएगा।



