
बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को विभिन्न छात्र संगठनों ने अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े छात्र युवा संघर्ष मोर्चा के बैनर तले निकले प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। इसे देखते हुए पुलिस प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे।
रामगुलाम चौक से शुरू हुआ मार्च
प्रदर्शनकारी छात्र रामगुलाम चौक से मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़े। पुलिस ने सबसे पहले गांधी मैदान के गेट संख्या-12 के पास उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन छात्र आगे बढ़ते हुए डाकबंगला चौराहे तक पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग कर जुलूस को वहीं रोक दिया। इस दौरान कुछ समय के लिए छात्रों और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली।
प्रमुख चौराहों पर सुरक्षा व्यवस्था
संभावित तनाव को देखते हुए प्रशासन ने जेपी गोलंबर, इनकम टैक्स चौराहा और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए वाटर कैनन की व्यवस्था भी की गई। पुलिस लगातार यह कोशिश कर रही कि प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर आगे न बढ़ सकें।
क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन में शामिल छात्र शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों को उठा रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालयों में खाली पड़े शिक्षकों के पदों पर जल्द नियुक्ति, विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 को निरस्त करने के प्रस्ताव को वापस लेना तथा शिक्षा से जुड़े फैसलों में छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों ने हाल के छात्र आंदोलनों में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि विभिन्न जिलों में आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। उन्होंने ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
छात्र संगठनों ने आंदोलन के दौरान प्रभावित छात्रों को मुआवजा देने, कथित दमनात्मक कार्रवाई की जांच कराने और दोषी पुलिस अधिकारियों पर उचित कार्रवाई करने की भी मांग दोहराई।
शिक्षा के बाजारीकरण का भी विरोध
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने शिक्षा के कथित बाजारीकरण का विरोध करते हुए कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे उच्च शिक्षा सभी छात्रों के लिए सुलभ और किफायती बनी रहे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी पांच सूत्री मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।



