
बिहार की राजनीति में गुरुवार को उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और प्रमुख प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पार्टी के ब्राह्मण चेहरे माने जाने वाले तिवारी ने संगठन में लगातार उपेक्षा और सम्मान की कमी का आरोप लगाते हुए यह फैसला लिया। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।
प्रदेश अध्यक्ष से की मुलाकात, इस्तीफा फिलहाल लंबित
मृत्युंजय तिवारी अपने इस्तीफे के साथ प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल से मिले। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जब संगठन में सम्मान नहीं मिल रहा है तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष ने उनसे अनुरोध किया कि तेजस्वी यादव के विदेश से लौटने तक कोई अंतिम फैसला न लें। इसी वजह से फिलहाल इस्तीफा लंबित बताया जा रहा है।
मीडिया में भूमिका कम होने से बढ़ी नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, मृत्युंजय तिवारी की नाराजगी पिछले कुछ समय से बढ़ रही थी। बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में उन्हें राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर पार्टी का पक्ष रखने का मौका कम दिया जाने लगा। उनकी जगह मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव की सक्रियता बढ़ने से भी असंतोष पैदा हुआ। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कई बार अपनी नाराजगी जताई थी।
नेताओं ने मनाने की कोशिश की
इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने मृत्युंजय तिवारी को निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए समझाने का प्रयास किया। पार्टी कार्यालय में कोषाध्यक्ष सुनील सिंह, तनवीर हसन समेत अन्य नेताओं ने उनसे बातचीत की। वहीं प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें आधिकारिक तौर पर इस्तीफा नहीं मिला है।
तेजस्वी यादव को लेकर भी जताई नाराजगी
इस्तीफे के बाद जारी अपने बयान में मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि पिछले छह–सात महीनों से उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में उन्होंने कई बार तेजस्वी यादव को अपनी बात बताई, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव के आसपास कुछ लोगों का ऐसा प्रभाव है, जिसके कारण पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बात उन तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही है।
आरजेडी के लिए कितने अहम हैं मृत्युंजय तिवारी
मृत्युंजय तिवारी लंबे समय से आरजेडी के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल रहे हैं और मीडिया मंचों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे हैं। उन्हें पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में भी गिना जाता है। ऐसे में उनका इस्तीफा न केवल संगठनात्मक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी आरजेडी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि तेजस्वी यादव की वापसी के बाद पार्टी इस संकट को कैसे संभालती है।



