
बिहार के सीवान जिले से स्वास्थ्य महकमे की बड़ी लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के गुठनी प्रखंड अंतर्गत पांडेगुड़ी गांव में नियमित टीकाकरण के महज कुछ ही घंटों बाद एक नवजात शिशु की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया है। बच्चे की मौत से आक्रोशित परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए एएनएम और आशा कार्यकर्ता पर घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। न्याय की गुहार लगाते हुए पीड़ित परिवार ने गुठनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी और स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराकर उच्चस्तरीय जांच एवं दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुधवार की दोपहर पांडेगुड़ी गांव में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में गांव की ही एएनएम किरण देवी और स्थानीय आशा कार्यकर्ता रीता देवी ने उक्त नवजात शिशु को टीका लगाया था। परिजनों का कहना है कि टीका लगने से पहले बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ था। लेकिन, टीकाकरण के कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। मासूम लगातार रोने लगा और उसके शरीर का तापमान भी असामान्य होने लगा।
टीका लगने के बाद मासूम ने तोड़ा दम
परिजनों ने गंभीर आरोप लगाया है कि जब बच्चे की हालत बिगड़ने लगी, तो उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें समय पर कोई उचित चिकित्सीय परामर्श या सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। उचित इलाज के अभाव में नवजात की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः बुधवार की देर रात उसने दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद पीड़ित परिवार में कोहराम मच गया। बच्चे की मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। नवजात की मौत की मनहूस खबर जैसे ही गांव में फैली, वहां भी मातम का माहौल छा गया। ग्रामीणों में भी स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।पीड़ित परिवार का स्पष्ट आरोप है कि टीकाकरण के दौरान एएनएम और आशा कार्यकर्ता द्वारा जरूरी सावधानियों और चिकित्सा सुरक्षा मानकों का तनिक भी ध्यान नहीं रखा गया। उनका यह भी कहना है कि स्वास्थ्य कर्मियों की इसी अनदेखी और लापरवाही के कारण उनके घर का चिराग बुझ गया। हालांकि, अभी तक नवजात की मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। यह चिकित्सा जांच का विषय है कि क्या बच्चे की मौत टीके के किसी प्रतिकूल प्रभाव (AEFI) के कारण हुई है या इसके पीछे कोई अन्य अंतर्निहित वजह थी।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस घटना ने इलाके के अन्य ग्रामीणों और अभिभावकों के बीच भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवजातों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए यह अभियान चलाया जाता है, लेकिन ऐसी घटनाएं लोगों के मन में टीकों की सुरक्षा को लेकर भय उत्पन्न कर देती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह के दुख का सामना न करना पड़े। इस पूरे प्रकरण पर गुठनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शब्बीर अख्तर ने बताया कि नवजात की मौत के संबंध में परिजनों की ओर से एक लिखित शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। डॉ. अख्तर ने सख्त लहजे में कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा। यदि इस घटना में एएनएम, आशा कार्यकर्ता या किसी भी अन्य स्वास्थ्य कर्मी की लापरवाही या चूक सामने आती है, तो उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



