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बाढ़ पीड़ितों के दर्द पर मरहम: मंत्री लखेंद्र पासवान ने सीएम राहत कोष में दिया अपना एक माह का वेतन

बिहार में इन दिनों उफनती नदियों ने भारी तबाही मचा रखी है। तटबंध टूटने और नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के कारण राज्य के कई जिले भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। लाखों की आबादी का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। इस गंभीर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के आगे आने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में एक बड़ी और मानवीय पहल करते हुए बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री तथा वरिष्ठ भाजपा नेता लखेंद्र पासवान ने अपना एक माह का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमआरएफ) में दान कर दिया है।अपना एक महीने का वेतन बाढ़ पीड़ितों के लिए समर्पित करने के बाद मंत्री लखेंद्र पासवान ने हालात पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि संकट की इस अत्यंत कठिन घड़ी में पूरी एनडीए सरकार और वे व्यक्तिगत रूप से बाढ़ पीड़ित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। मंत्री ने कहा, “बाढ़ के कारण संकट में घिरे लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना, उनके लिए पर्याप्त खाद्य सामग्री की व्यवस्था करना और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना वर्तमान में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार का पूरा तंत्र पूरी संवेदनशीलता के साथ जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है।”

सुरक्षा और स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

राज्य के विभिन्न जिलों में बाढ़ से उत्पन्न हुई विनाशकारी परिस्थितियों को देखते हुए मंत्री का यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए गए इस आर्थिक योगदान से प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री के सुचारू वितरण, सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) के निरंतर संचालन और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को अतिरिक्त गति मिलेगी। मंत्री लखेंद्र पासवान ने केवल अपना योगदान ही नहीं दिया, बल्कि समाज के अन्य वर्गों से भी एक विशेष आह्वान किया। उन्होंने अन्य सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आर्थिक रूप से सक्षम नागरिकों से अपील की है कि वे भी इस चुनौतीपूर्ण समय में आगे आएं और बाढ़ पीड़ितों की उदारतापूर्वक सहायता करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल सामूहिक प्रयासों और परस्पर सहयोग से ही इस व्यापक आपदा का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकता है और उजड़े हुए परिवारों को फिर से बसाया जा सकता है।

सामूहिक प्रयासों से होगा आपदा का सामना

विदित हो कि राज्य सरकार के कड़े निर्देशों के बाद सभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय जिला प्रशासन, राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें लगातार मुस्तैद हैं। दिन-रात युद्ध स्तर पर बचाव कार्य चलाकर लोगों को सुरक्षित शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। वहीं, मंत्री लखेंद्र पासवान द्वारा उठाए गए इस कदम की प्रशासनिक महकमे के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी खूब सराहना हो रही है।

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