
पटना। बिहार की राजनीति में शहरों और रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने को लेकर एक बार फिर से सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बार चर्चा के केंद्र में कोई आम जगह नहीं, बल्कि सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जन्मभूमि ‘बख्तियारपुर’ है। वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने इस पूरे मुद्दे को नई हवा दे दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि बख्तियारपुर का नाम जरूर बदला जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी आधिकारिक तौर पर नाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है या नहीं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। लेकिन सीएम के इस बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार के एजेंडे में ऐतिहासिक भूलों को सुधारने की जगह बनी हुई है। एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान सीएम सम्राट चौधरी ने इतिहास का हवाला देते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जिस बख्तियार खिलजी ने बिहार में अराजकता फैलाई और ज्ञान के सबसे बड़े वैश्विक केंद्र ‘नालंदा विश्वविद्यालय’ को जलाकर राख कर दिया, उस आक्रांता के नाम पर हमारे किसी शहर का नाम होना कतई उचित नहीं माना जा सकता। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य महज नाम बदलना नहीं है, बल्कि बिहार की असली अस्मिता, संस्कृति और गौरवशाली पहचान को दुनिया के सामने लाना है। उन्होंने भगवान बुद्ध के शांति संदेश, भगवान महावीर, सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह, माता सीता और गया की पौराणिक पिंडदान परंपरा का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया।
आक्रांता के नाम पर शहर का होना अनुचित
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने सूबे में प्रस्तावित नए टाउनशिप का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इन टाउनशिप को बिहार के स्वर्णिम इतिहास से जोड़ा जा रहा है। पटना में बन रहे नए टाउनशिप का नाम ऐतिहासिक ‘पाटलिपुत्र’ रखा गया है। इसी तर्ज पर गया में ‘मगध’, मुंगेर में दानवीर कर्ण की पहचान ‘अंग’, और भागलपुर में ‘विक्रमशिला’ टाउनशिप विकसित हो रही है। इसके अलावा सहरसा को ‘कोसी’, दरभंगा को ‘मिथिला’, मुजफ्फरपुर को ‘तिरहुत’ और छपरा को ‘सारण’ की पहचान दी गई है।
नीतीश कुमार की यादों में बसा है ‘बख्तियारपुर’
गौरतलब है कि यह मुद्दा इसलिए भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि बख्तियारपुर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पैतृक गांव है। 1 मार्च 1951 को यहीं जन्मे नीतीश अक्सर अपने बचपन की यादें साझा करते रहे हैं। एक मशहूर भावुक किस्सा है कि जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तो अपने कक्ष से सबसे पहले अपनी मां को बख्तियारपुर फोन कर मगही में आशीर्वाद लिया था। उन्होंने कहा था- “मां जी, मुन्ना बोल ही, आशीर्वाद देहो… कुर्सी पर बैठे से जिम्मेवारी बढ़ गेलई ह।”अब सूबे के सियासी गलियारों और आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि क्या नीतीश कुमार के हृदय में बसने वाले बख्तियारपुर का नाम वास्तव में इतिहास के पन्नों में बदल जाएगा? मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस बयान के बाद हर किसी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिक गई हैं।



