
पटना में सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों की मुख्य मांग थी कि लंबे समय से रुकी हुई परीक्षाएं जल्द कराई जाएं, उनके परिणाम जारी किए जाएं और संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी नौकरी दी जाए। अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने बीएसएससी कार्यालय का घेराव किया और मुख्य गेट पर ताला लगाकर विरोध जताया। इस दौरान उन्होंने सरकार और आयोग के खिलाफ नारेबाजी भी की।
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों का कहना था कि कई भर्ती परीक्षाएं लंबे समय से लंबित हैं। इससे हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से परीक्षा और परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
अभ्यर्थियों ने विशेष रूप से इंटरमीडिएट स्तर की भर्ती परीक्षा, बीएसएससी सीजीएल-4 परीक्षा और बीएसओ सहित अन्य लंबित भर्तियों को जल्द पूरा कराने की मांग की। उनका कहना है कि जिन परीक्षाओं की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, उन्हें बिना किसी देरी के पूरा किया जाए और जिन परीक्षाओं के परिणाम रुके हुए हैं, उन्हें भी जल्द से जल्द प्रकाशित किया जाए।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता सौरव ने कहा कि आयोग की देरी के कारण हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा भी धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर परीक्षाएं और नियुक्तियां नहीं होंगी, तो युवाओं की मेहनत बेकार चली जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी किया जाए। उनका कहना है कि वर्षों से काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी नौकरी का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे कर्मचारियों को नियमित कर सरकार को उनका भविष्य सुरक्षित करना चाहिए।
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और लंबित परीक्षाओं के परिणाम जारी नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे आगे भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
प्रदर्शन के दौरान बीएसएससी कार्यालय के बाहर कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण रहा, हालांकि स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस बल भी मौके पर मौजूद था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार और आयोग को युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। समय पर परीक्षाएं और नियुक्तियां होने से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि सरकारी विभागों में खाली पद भी जल्द भर सकेंगे। अब सभी की नजर आयोग और सरकार के अगले कदम पर है कि अभ्यर्थियों की मांगों पर कब तक फैसला लिया जाता है।



