
पटना। भागलपुर जिले में गंगा नदी एक बार फिर अपने उग्र और विनाशकारी रूप में आ गई है। नवगछिया पुलिस जिला के अंतर्गत राघोपुर और लत्तीपुर के समीप गंगा के भीषण कटाव ने स्थानीय लोगों और प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। नदी की तेज और अनियंत्रित जलधारा के कारण दशकों पुराना रेलवे तटबंध पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। तटबंध के नदी में समा जाने के बाद अब इलाके की लाइफलाइन मानी जाने वाली 14 नंबर सड़क पर सीधा और गंभीर खतरा मंडराने लगा है। अगर समय रहते कटाव पर काबू नहीं पाया गया, तो यह महत्वपूर्ण सड़क भी गंगा के गर्भ में समा सकती है, जिससे एक बड़ी आबादी का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाएगा।
एनएच-31 से जुड़ती है यह महत्वपूर्ण सड़क
विदित हो कि यह 14 नंबर सड़क कोई आम सड़क नहीं है, बल्कि यातायात के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। यह विक्रमशिला सेतु के जाह्नवी चौक से शुरू होकर बिहपुर को जोड़ती है और आगे जाकर सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-31) में मिल जाती है। उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने वाले इस मार्ग पर प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में इस सड़क को कटाव से बचाना जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। तटबंध कटने के बाद से राघोपुर पंचायत के ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है और उन्हें अपने घरों की चिंता सता रही है। कटाव की भयावह स्थिति की सूचना मिलते ही प्रदेश के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र और ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल ने घटनास्थल का दौरा किया। पटना से आए जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारी भी मौके पर कैंप कर रहे हैं। निरीक्षण के बाद पथ निर्माण मंत्री ने कहा कि गंगा का जलस्तर फिलहाल नीचे है, इसलिए तत्काल इलाके में बाढ़ का खतरा नहीं है। बचाव कार्य पूरी तेजी से किए जा रहे हैं। वहीं, ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त जहाज व तकनीकी विशेषज्ञ भी तत्काल उपलब्ध कराए जाएंगे।
रतजगा करने को मजबूर हैं खौफजदा ग्रामीण
प्रशासन भले ही कटाव को स्थिर बता रहा है, लेकिन ग्रामीणों का खौफ कम नहीं हुआ है। डर के साये में जी रहे लोग रात-रात भर जागकर टॉर्च की रोशनी में नदी की लहरों पर पहरा दे रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर अचानक रात में कटाव तेज हुआ तो वे अपना जरूरी सामान भी नहीं निकाल पाएंगे। स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि कटाव नियंत्रण के लिए सिर्फ तात्कालिक उपाय न किए जाएं, बल्कि बोल्डर पिचिंग जैसी कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था की जाए ताकि हर साल की इस तबाही से मुक्ति मिल सके। पूरे इलाके की निगाहें अब बचाव कार्य पर टिकी हैं।



