
पटना। बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भ्रष्टाचार और सरकारी कार्यों में घोर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल के सख्त निर्देश पर 9 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र गठित करने और कड़े दंड के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। सरकार की इस बड़ी और त्वरित कार्रवाई से अंचल कार्यालयों से लेकर पटना मुख्यालय में तैनात कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार, जिन अधिकारियों पर गाज गिरी है, उन पर आम लोगों से जुड़े कार्यों में भारी अनियमितता बरतने के आरोप हैं। इनमें मुख्य रूप से दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में गड़बड़ी, सरकारी जमीन की फर्जी जमाबंदी कायम करने और म्यूटेशन को निपटाने के लिए डिजिटल डोंगल के अवैध इस्तेमाल जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता के कार्यों में लालफीताशाही, लापरवाही या भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गंभीर आरोपों में हुई कार्रवाई
कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों में अमोद कुमार का नाम प्रमुखता से शामिल है। उन पर दो अलग-अलग मामलों में गाज गिरी है। दाखिल-खारिज में गलत अनुशंसा करने के आरोप में उनकी पेंशन से अगले पांच साल तक 10 प्रतिशत राशि काटने का आदेश दिया गया है। वहीं, गलत पारिवारिक सूची के आधार पर अनुशंसा के एक अन्य मामले में अगले पांच वर्षों तक उनकी पेंशन से 15 प्रतिशत राशि काटी जाएगी।इसके अलावा, चंदन कुमार पर ऑफलाइन जमाबंदी को फर्जी तरीके से ऑनलाइन करने का आरोप प्रमाणित हुआ है, जिसके लिए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बिहार में भूमि विवाद और उससे जुड़ी आपराधिक घटनाएं हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही हैं। अंचल स्तर पर फैले भ्रष्टाचार को इसका एक बड़ा कारण माना जाता है। ऐसे में मंत्री दिलीप जायसवाल का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि राजस्व विभाग को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। विभाग अब पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में आ गया है।



