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साइबर अपराधियों पर बड़ा प्रहार: 507 गिरफ्तार, पीड़ितों को लौटाए गए 2.24 करोड़ रुपये

पटना । बिहार में तेजी से पैर पसार रहे साइबर अपराध और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। साइबर अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन साइबर प्रहार’ के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 507 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें साइबर ठगी रोकने और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए कई अहम निर्देश दिए गए।समीक्षा बैठक में बताया गया कि संगठित साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस का अभियान रंग ला रहा है। अब तक 6,251 ‘म्यूल बैंक खातों’ (धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले खाते) का सत्यापन किया जा चुका है और 702 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। राहत की बात यह है कि पुलिस केवल अपराधियों को पकड़ ही नहीं रही, बल्कि पीड़ितों के खून-पसीने की कमाई भी वापस दिला रही है। ‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए 5,642 मामलों में पीड़ितों को 224.53 लाख रुपये (करीब 2.24 करोड़) लौटाने के आदेश जारी किए जा चुके हैं।

वहीं, बैंक खाते फ्रीज होने से जुड़ी शिकायतों में 98 प्रतिशत मामलों का समाधान किया गया है।बैठक में यह चौंकाने वाला आंकड़ा भी सामने आया कि देश के शीर्ष साइबर अपराध हॉटस्पॉट जिलों में बिहार के चार जिले शामिल हैं। इनमें नवादा दूसरे, नालंदा चौथे, पटना सातवें और शेखपुरा 15वें स्थान पर है। इसके अलावा, एटीएम और चेक के जरिए धोखाधड़ी कर पैसे निकालने के मामलों में भी राजधानी पटना देश के प्रमुख हॉटस्पॉट में शामिल है। मुख्य सचिव ने इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाने और त्वरित कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए हैं।आम जनता को साइबर ठगी से बचाने के लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के व्यापक प्रचार-प्रसार की रणनीति भी तैयार की गई है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि बिजली बिलों, बिजली भुगतान वाले मोबाइल ऐप और सुधा डेयरी के उत्पादों की पैकेजिंग व पार्लरों पर हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट रूप से छापा जाए। साथ ही नगर निगमों के डिजिटल होर्डिंग, एलईडी स्क्रीन और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जागरूकता संदेश चलाने के अलावा स्कूलों व कॉलेजों में नियमित रूप से ‘साइबर मंगलवार’ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है।अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि एक लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तत्काल ‘ई-जीरो एफआईआर’ दर्ज की जाए और उसे जल्द ही नियमित एफआईआर में बदला जाए। जिलाधिकारियों को बैंकर्स समिति (DLBC) के साथ समन्वय स्थापित कर संदिग्ध खातों को तुरंत फ्रीज करने और पीड़ितों की राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है। राज्य में साइबर अपराधों के वैज्ञानिक अनुसंधान को धार देने के लिए अब तक 4,221 पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है और दूसरे राज्यों से प्राप्त जांच अनुरोधों में बिहार पुलिस ने 90.22 प्रतिशत मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया है।

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