
पटना। बिहार के सियासी गलियारों में शुक्रवार को उस वक्त अचानक हलचल मच गई, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेश कुमार ने अपनी सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने विधान परिषद के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपा। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो देवेश कुमार का यह इस्तीफा राज्य के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश (उपेन्द्र कुशवाहा के पुत्र) के लिए उच्च सदन का रास्ता साफ करने के उद्देश्य से दिलाया गया है।**शाम के वक्त गुपचुप तरीके से सौंपा इस्तीफा**जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार की शाम देवेश कुमार पिछले दरवाजे से बिहार विधान परिषद पहुंचे। इस दौरान उनके साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी सहित पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। सभापति को इस्तीफा सौंपने के बाद से ही यह स्पष्ट हो गया है कि इस खाली हुई सीट से अब दीपक प्रकाश को एनडीए के उम्मीदवार के तौर पर विधान परिषद भेजा जाएगा।विदित हो कि दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री का महत्वपूर्ण जिम्मा संभाल रहे हैं, परंतु वे अब तक विधानसभा या विधान परिषद में से किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत किसी भी मंत्री के लिए यह अनिवार्य है कि वह शपथ ग्रहण के छह महीने के भीतर विधानमंडल के किसी एक सदन की सदस्यता अवश्य प्राप्त कर ले, अन्यथा उन्हें मंत्री पद गवाना पड़ता है।छह महीने की समय सीमा करीब आने के कारण दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर संवैधानिक संकट गहरा गया था।
मुख्य विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार नीतीश सरकार पर हमलावर थे और नियमों की अनदेखी का आरोप लगा रहे थे। बात सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह मामला अदालत की दहलीज तक भी पहुंच गया था। न्यायालय द्वारा इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब तलब किए जाने के बाद सरकार और एनडीए नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया था।देवेश कुमार के इस्तीफे को एनडीए की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सरकार में संतुलन बनाए रखने, उपेन्द्र कुशवाहा के धड़े को संतुष्ट रखने और मंत्रियों की संवैधानिक स्थिति को मजबूत करने के लिए भाजपा ने अपनी एक विधान परिषद सीट की कुर्बानी दी है। फिलहाल, इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है, लेकिन देवेश कुमार के त्यागपत्र के बाद अब दीपक प्रकाश का विधान परिषद का सदस्य बनना और उनके मंत्री पद का सुरक्षित होना लगभग तय हो गया है।



