
मोतिहारी। जिले के बंजरिया प्रखंड में सरकारी योजनाओं में लूट-खसोट और अनियमितता का एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। विकास के दावों की पोल खोलती यह घटना सेमरा स्थित श्री महावीर विष्णु उच्च विद्यालय सह मॉडल विद्यालय परिसर की है। यहां मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत पेवर ब्लॉक निर्माण के नाम पर सरकारी खजाने में सेंधमारी की गई है। बिना कोई वास्तविक कार्य किए धड़ल्ले से मास्टर रोल भरकर योजना की राशि डकारने के इस खेल ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर में जी. राम जी योजना के अंतर्गत पेवर ब्लॉक बिछाने का कार्य स्वीकृत था। नियमानुसार, पेवर ब्लॉक बिछाने से पूर्व धरातल पर समतलीकरण और मिट्टी भराई का कार्य होना अनिवार्य है। लेकिन, बिचौलियों और विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से धरातल पर काम करने के बजाय केवल कागजी घोड़े दौड़ाए गए। आरोप है कि मौके पर मिट्टी का एक कण भी नहीं डाला गया। फर्जीवाड़े को छिपाने और उच्चाधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए जमीन से केवल घास छील दी गई। इसी घास छिले हुए मैदान की तस्वीरें खींचकर मनरेगा पोर्टल पर अपलोड कर दी गईं। हद तो तब हो गई जब इसी फर्जी काम के आधार पर प्रतिदिन का मास्टर रोल भरकर पहले चरण का भुगतान भी सफलतापूर्वक निकाल लिया गया।
कागजों पर बिछ गए पेवर ब्लॉक
जैसे ही इस ‘घास घोटाले’ की भनक स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को लगी, प्रखंड मुख्यालय में खलबली मच गई। जानकारी के मुताबिक, एक मास्टर रोल का भुगतान हो चुका है और दूसरा वर्तमान में संचालित दिखाया जा रहा था। बिना कोई कार्य किए राशि डकारने की इस साजिश ने पंचायत स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ कर रख दी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के नाम पर केवल रुपयों की बंदरबांट की जा रही है।मामला तूल पकड़ते ही बंजरिया के प्रखंड प्रमुख अनिल कुमार उर्फ पप्पू यादव ने इसे पूरी गंभीरता से लिया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस पूरे प्रकरण की सघन जांच की जाए। साथ ही, इस योजना के तहत होने वाले किसी भी अगले और अग्रिम भुगतान पर तुरंत रोक लगा दी गई है।
सिर्फ घास छीलकर निकाल लिए पेवर ब्लॉक के पैसे
दूसरी ओर, मोतिहारी के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) डॉ. प्रदीप कुमार ने भी इस फर्जीवाड़े का कड़ा संज्ञान लिया है। डीडीसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पूरे मामले की एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी। सरकारी राशि के गबन और भ्रष्टाचार में जो भी अधिकारी, कर्मचारी या बिचौलिया संलिप्त पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।बहरहाल, अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। देखना यह दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले में दोषियों पर कब तक और कितनी सख्त कार्रवाई करता है, या फिर भ्रष्टाचार का यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।



