
पटना। बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए करीब एक दशक पूरा होने को है। इतने वर्षों बाद भी राज्य में इस कानून के क्रियान्वयन, अवैध शराब की बरामदगी और जहरीली शराब के मामलों को लेकर राजनीतिक व प्रशासनिक हलकों में लगातार बहस छिड़ी रहती है। इन तमाम चर्चाओं और सवालों के बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकार की नीति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ किया है कि राज्य सरकार शराबबंदी कानून को लेकर किसी भी तरह के समझौते या बदलाव के मूड में नहीं है।एक विशेष बातचीत के दौरान उपमुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि शराबबंदी के फैसले से राज्य के खजाने को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने आधिकारिक आंकड़े का उल्लेख करते हुए बताया कि बिहार को हर साल लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा होता है।
जहरीली शराब और तस्करी बनी सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार वित्तीय लाभ या नुकसान की तुलना में सामाजिक कल्याण और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देती है। सरकार आर्थिक क्षति को शराबबंदी जैसी महत्वाकांक्षी और सामाजिक नीति को वापस लेने का आधार नहीं मानती।शराबबंदी को नीतीश सरकार का एक ऐतिहासिक निर्णय करार देते हुए उन्होंने इसके पीछे के सामाजिक पहलुओं को उजागर किया। सम्राट चौधरी ने कहा कि यह फैसला राज्य की आधी आबादी, यानी महिलाओं की पुरजोर मांग और उनके साथ हुए सीधे संवाद के आधार पर लिया गया था। शराबबंदी केवल एक प्रशासनिक नियम नहीं है, बल्कि यह बिहार की लाखों महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और परिवार की खुशहाली से सीधा जुड़ा हुआ विषय है। यही कारण है कि भारी आर्थिक दबाव के बाद भी सरकार अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नहीं है।हालांकि, उपमुख्यमंत्री ने माना कि राज्य में जहरीली शराब का सेवन और अवैध बिक्री निश्चित रूप से चिंताजनक विषय है। कानून लागू होने के इतने वर्षों बाद भी पूर्ण शराबबंदी के दावों पर सवाल खड़े होते रहते हैं। आए दिन बिहार के अलग-अलग जिलों से तस्करी और अवैध निर्माण की खबरें सामने आती हैं। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी परीक्षा इस कानून को कागजों से इतर जमीन पर पूरी तरह प्रभावी ढंग से लागू करने की है।
जहरीली शराब और तस्करी बनी सबसे बड़ी चुनौती
सरकार के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार में फिलहाल शराबबंदी खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। आर्थिक नुकसान को दरकिनार करते हुए सरकार ने अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता दोहराई है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में पुलिस और आबकारी विभाग अवैध शराब के इस पूरे नेटवर्क, अंतरराज्यीय तस्करी और जहरीली शराब के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।



