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बिहार एमएलसी चुनाव: 8 सीटों पर 150 उम्मीदवारों की किस्मत का कल होगा फैसला, 5.32 लाख मतदाता करेंगे मतदान

पटना। बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की आठ सीटों के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर को मतदान होगा। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए होने वाले इस चुनाव में 150 उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य दांव पर है। कुल 993 मतदान केंद्रों पर 5 लाख 32 हजार 847 मतदाता बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिए अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। बुधवार शाम चुनाव प्रचार का शोर थमने के बाद अब सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने बूथ प्रबंधन और जनसंपर्क पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है, लेकिन जन सुराज और बागियों ने कई सीटों पर चुनावी समीकरणों को बेहद उलझा दिया है। इन सभी आठ सीटों के नतीजे 27 अक्टूबर को आएंगे।

स्नातक सीटों पर सर्वाधिक मतदाता, शिक्षक सीटों पर भी भारी उत्साह

विधान परिषद के इस चुनाव में स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों (पटना, दरभंगा, कोसी और तिरहुत) में सर्वाधिक 4,92,594 मतदाता हैं। इनमें 3,55,522 पुरुष, 1,37,038 महिला तथा 34 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। दूसरी ओर, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों (पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण) में कुल 40,253 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 30,677 पुरुष, 9,573 महिला और 3 थर्ड जेंडर मतदाता पंजीकृत हैं। मतदान सुबह आठ बजे से शुरू होकर शाम चार बजे तक चलेगा। उम्मीदवारों की संख्या के लिहाज से दरभंगा स्नातक सीट पर इस बार सबसे बड़ी सियासी जंग देखने को मिल रही है। यहां से सर्वाधिक 40 उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में हैं, जिससे मुकाबला बहुकोणीय और बेहद दिलचस्प हो गया है। इसके अलावा पटना स्नातक से 18, तिरहुत स्नातक से 17 और कोसी स्नातक से 15 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की बात करें तो पटना और सारण शिक्षक सीट पर 18-18 उम्मीदवार, दरभंगा में 13 और तिरहुत में 11 प्रत्याशी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। सभी सीटों पर निवर्तमान प्रतिनिधि भी दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं, जिनके लिए अपनी मौजूदा सीट बचाना साख का सवाल बन गया है।

स्नातक सीटों पर सर्वाधिक मतदाता, शिक्षक सीटों पर भी भारी उत्साह

इस बार के चुनाव में सबसे रोचक पहलू महागठबंधन के भीतर की खींचतान है। कई सीटों पर मुख्य विपक्षी दलों—राजद और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बन पाई, जिसके चलते दोनों के उम्मीदवार एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। वाम दलों ने भी अपनी दावेदारी पेश की है। राजद ने 6 और कांग्रेस ने 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। पटना शिक्षक, पटना स्नातक, कोसी और दरभंगा स्नातक सीटों पर दोनों दल आपस में ही टकरा रहे हैं। हालांकि, सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक पर कांग्रेस ने तथा दरभंगा और तिरहुत शिक्षक सीट पर राजद ने प्रत्याशी नहीं दिए हैं। इस आपसी टकराव का सीधा फायदा उठाने की जुगत में एनडीए के उम्मीदवार लगे हुए हैं। बिहार की सियासत में नई ऊर्जा के साथ उतरी जन सुराज और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले निर्दलीय प्रत्याशियों ने एनडीए और महागठबंधन, दोनों खेमों की रातों की नींद उड़ा दी है। खासतौर पर उन सीटों पर जहां हार-जीत का मार्जिन बेहद कम होता है, वहां ये उम्मीदवार ‘वोट कटवा’ की जगह निर्णायक भूमिका में नजर आ रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं। संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और पूरी मतदान प्रक्रिया की कड़ी निगरानी की जाएगी। गुरुवार को दिन भर प्रत्याशी अपने कोर वोटरों को साधने और उन्हें बूथ तक लाने की रणनीति बनाने में जुटे रहे। अब शुक्रवार को बैलेट बॉक्स में कैद होने वाला जनादेश 27 अक्टूबर को तय करेगा कि बिहार विधान परिषद के उच्च सदन में किसका दबदबा कायम रहता है और किसे निराशा हाथ लगती है।

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