
राजधानी पटना की सड़कें मंगलवार को दिनभर रणक्षेत्र में तब्दील रहीं। अपनी-अपनी मांगों को लेकर ‘लोकभवन मार्च’ पर निकले विभिन्न छात्र संगठनों और पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का विरोध कर रहे किसानों के उग्र प्रदर्शन के कारण शहर का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेडिंग की और वाटर कैनन (पानी की बौछार) का इस्तेमाल किया। हालांकि, जब डाकबंगला चौराहे पर भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस को लाठीचार्ज कर उन्हें तितर-बितर करना पड़ा। इस दौरान कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी और फतुहा सहित कई इलाकों से भारी संख्या में किसान पटना पहुंचे थे। ये किसान राज्य सरकार की प्रस्तावित ‘पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप’ के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण से खासे नाराज हैं। किसानों का दो टूक कहना है कि उनकी जमीन खेती योग्य है, जिससे वे साल में तीन फसलें उगाते हैं। इसी जमीन से उनके परिवार की आजीविका चलती है, बच्चों की पढ़ाई और बेटियों की शादी होती है, इसलिए वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। स्थिति को संभालने के लिए पटना के डीएम, एसएसपी और एसपी भी मौके पर पहुंचे और किसान प्रतिनिधियों से वार्ता का प्रयास किया।छात्रों और किसानों पर हुए लाठीचार्ज की घटना पर बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन महीनों में देश में लोकतंत्र की असली ताकत देखने को मिली है। पहले आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज आम बात थी, लेकिन अब पुलिस लाठियां भांजने से पहले दस बार सोच रही है। इसे एक बड़े और सकारात्मक बदलाव के तौर पर देखा जाना चाहिए।छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए प्रशांत किशोर ने सरकार को चेताया। उन्होंने कहा कि देशभर में शिक्षा का निजीकरण और कोचिंग संस्थानों के जरिए जो व्यवसायीकरण हो रहा है, उसके साथ ही पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों से युवाओं का एक बड़ा वर्ग मौजूदा व्यवस्था से खफा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार छात्रों की इन जायज मांगों को दबा नहीं सकती। अगर समय रहते इन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में सड़कों पर और भी उग्र छात्र आंदोलन देखने को मिलेंगे। यह पूछे जाने पर कि छात्र अभ्यर्थी उन्हें खोज रहे हैं, किशोर ने चुटकी लेते हुए कहा, “अगर लोग मुझे खोज रहे हैं, तो मैं पटना में ही हूं और रोज यहीं घूम रहा हूं।”टाउनशिप के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए प्रशांत किशोर ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार बिना कुछ समझे-बूझे बड़े उद्योगपतियों की मदद कर रही है और किसानों की महंगी जमीन औने-पौने दामों पर बेचने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने के पैसे नहीं हैं, वह हजारों एकड़ जमीन कैसे एक्वायर करेगी और उसका मुआवजा कैसे देगी? उन्होंने दावा किया कि री-डेवलपमेंट के नाम पर कोई भी किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है और सरकार इस कानून को बिहार में लागू नहीं कर पाएगी।



