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13 करोड़ के पुल में बड़ा ‘खेला’: उद्घाटन के 22 दिन बाद ही धंसी एप्रोच सड़क, हाथ से उखड़ रही गिट्टी

मोतिहारी। बिहार में पुलों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्वी चंपारण जिले में 13.71 करोड़ रुपये की लागत से बना मजुरहा-हरदिया पुल उद्घाटन के महज 22 दिन बाद ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। पुल की एप्रोच सड़क न केवल धंस गई है, बल्कि मरम्मत के नाम पर की गई लीपापोती का आलम यह है कि सड़क में डाला गया कंक्रीट और गिट्टी अब लोगों के हाथों से ही उखड़ने लगी है। पथ निर्माण विभाग के इस अजब-गजब कारनामे ने विभागीय कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है।

जानकारी के अनुसार, जिले के करीब 10 प्रखंडों को सीधा जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले 72 मीटर लंबे और 7.5 मीटर चौड़े इस आरसीसी पुल का उद्घाटन कुछ ही दिन पहले हुआ था। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से इलाके के हजारों लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी। लेकिन, उद्घाटन के बमुश्किल तीन सप्ताह (22 दिन) बीतने के बाद ही एप्रोच पथ में करीब 20 फीट लंबी दरार उभर आई। देखते ही देखते सड़क का एक बड़ा हिस्सा नीचे की ओर धंसने लगा, जिससे निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता पर शुरू से ही सवाल उठने लगे।

मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति, रिपेयरिंग भी फेल

सड़क धंसने की शिकायत सामने आने के बाद पथ निर्माण विभाग और स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। मामले को रफा-दफा करने के लिए आनन-फानन में एप्रोच पथ की मरम्मत कराई गई, लेकिन यह रिपेयरिंग भी पूरी तरह से फेल साबित हुई। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने अपनी कमियों को छिपाने के लिए जल्दबाजी में घटिया कंक्रीट और अलकतरा सड़क पर बिछा दिया। स्थिति यह है कि मरम्मत के कुछ ही घंटों बाद सड़क की ऊपरी परत फिर से खराब होने लगी। अब ग्रामीण अपने हाथों से सड़क की गिट्टी उखाड़कर विभाग के इस कारनामे को उजागर कर रहे हैं। इस मामले ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। राजद नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र राम ने निर्माण कार्य में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए इसे सीधे तौर पर ‘अधिकारी-ठेकेदार-जनप्रतिनिधि’ के भ्रष्ट गठजोड़ का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि सरकारी खजाने की इस तरह की खुली लूट बर्दाश्त नहीं की जा सकती। पूर्व विधायक ने मांग की है कि सिर्फ ऊपरी तौर पर लीपापोती करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। एप्रोच पथ की मौजूदा जर्जर स्थिति को देखते हुए इसे पूरी तरह से तोड़कर नए सिरे से गुणवत्तापूर्ण तरीके से बनाया जाना चाहिए, साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल, 13 करोड़ से अधिक की लागत वाली इस परियोजना की दुर्दशा ने पूरे इलाके के लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग इस मामले में उच्चस्तरीय जांच बैठाता है या फिर यह भ्रष्टाचार भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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