
बिहार में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने तथा संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम यानी CCA के तहत जिलाधिकारियों को अतिरिक्त प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार दिए गए हैं। इसके जरिए असामाजिक तत्वों, संगठित अपराधियों और विभिन्न तरह के माफिया नेटवर्क पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है।
गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, राज्य के सभी जिलाधिकारियों को 25 सितंबर 2026 से 24 मार्च 2027 तक छह महीने के लिए ये अधिकार दिए गए हैं। इसके तहत ऐसे लोगों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिनसे शांति भंग होने या अपराध किए जाने की आशंका हो।
बॉन्ड नहीं भरने पर जेल भेजने की शक्ति
नए प्रावधानों के तहत अगर कोई व्यक्ति शांति बनाए रखने के लिए निर्धारित बॉन्ड भरने से इनकार करता है या बाद में बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो जिलाधिकारी उसके खिलाफ जेल भेजने की कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं।इसके अलावा किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त साक्ष्य को लेकर भी जिलाधिकारी को अधिकार दिए गए हैं। यदि नोटिस या आदेश मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति फरार हो जाता है, तो उसकी संपत्ति की कुर्की और जब्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
इन अपराधों पर भी लागू होगा CCA
संशोधित कानून के दायरे में अब कई नई गतिविधियों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- सरकारी, सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर अवैध कब्जा अथवा बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना
- प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित कदाचार
- अवैध खनन और खनन से जुड़े संगठित अपराध
- वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले अपराध
- सोशल मीडिया के जरिए जाति, धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर नफरत और वैमनस्य फैलाना
- मानव तस्करी
- विस्फोटक, हथियार, गोला-बारूद या बम रखने और इनके अवैध कारोबार में शामिल होना
इस तरह अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए कानून के दायरे को भी व्यापक किया गया है।
डीएम को मिलेंगे कई अहम अधिकार
CCA के तहत जिलाधिकारी किसी चिन्हित अपराधी को जिले या जिले के किसी हिस्से से बाहर जाने का निर्देश दे सकते हैं। इसके अलावा संबंधित व्यक्ति को नियमित रूप से थाने में हाजिरी लगाने, अपनी गतिविधियों की जानकारी देने और निर्धारित शर्तों का पालन करने का आदेश दिया जा सकता है।जरूरत पड़ने पर संदिग्ध व्यक्तियों की तलाशी, संपत्ति की जब्ती और वारंट जारी करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकेगी। लोक व्यवस्था के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों को हिरासत में लेने का आदेश देने की शक्ति भी जिलाधिकारी के पास होगी।
कार्रवाई की अवधि बढ़ाने का भी प्रावधान
सरकार की मंजूरी मिलने पर लगाई गई पाबंदी को पहली बार में अधिकतम 12 महीने तक जारी रखा जा सकता है। इसके बाद इसे छह-छह महीने के लिए आगे बढ़ाने का प्रावधान है।नोटिस जारी करने के साथ संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वारंट की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है। बॉन्ड और वारंट से जुड़े मामलों में जिलाधिकारी को सक्षम न्यायालय के समान कुछ शक्तियां प्रदान की गई हैं।
भू-माफिया और अवैध कब्जाधारियों पर भी नजर
बिहार में जमीन पर अवैध कब्जे और भू-माफिया से जुड़े मामले लंबे समय से चुनौती रहे हैं। संशोधित प्रावधानों के बाद किसी की चल या अचल संपत्ति पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने या संपत्ति को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ भी CCA के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।सार्वजनिक, सरकारी या निजी संपत्ति में तोड़फोड़ और हिंसक उपद्रव के जरिए भारी नुकसान पहुंचाने वालों पर भी निरोधात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
पेपर लीक और रंगदारी गिरोह पर भी सख्ती
प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लीक करने, नकल कराने या पेपर बेचने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ भी CCA के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इसी तरह सोशल मीडिया पर धर्म, जाति, भाषा या समुदाय के आधार पर घृणा फैलाने अथवा हिंसा भड़काने वाली गतिविधियों में शामिल लोगों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
संगठित अपराध में शामिल ऐसे गिरोह, जो धमकी, हिंसा या दबाव के जरिए रंगदारी और अवैध वसूली करते हैं, उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाया जा सकेगा। इसके अलावा बालू और गिट्टी के अवैध खनन तथा जंगल की लकड़ी और वन्यजीवों की तस्करी के जरिए सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों पर भी कानून का शिकंजा कसने की तैयारी है।
कुल मिलाकर संशोधित CCA के जरिए बिहार सरकार ने संगठित अपराध, अवैध कब्जे, पेपर लीक, अवैध खनन, रंगदारी और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली गतिविधियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई का दायरा बढ़ाया है।



