
मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले में शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद को और मजबूत करने तथा शैक्षणिक गुणवत्ता को नया आयाम देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक अनोखी और सराहनीय पहल की है। सोमवार, 30 सितंबर को जिले के आला अधिकारी अपने दफ्तरों से निकलकर सीधे स्कूलों में पहुंचे और शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत परखी। सबसे खास बात यह रही कि इस दौरान जिलाधिकारी खुद शिक्षक की भूमिका में नजर आए, जिसे देखकर बच्चे भी उत्साहित हो उठे।
स्मार्ट क्लास से लेकर लैब तक की हुई सघन जांच
जिले में चिन्हित सभी 33 ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ (आदर्श विद्यालयों) का औचक निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी ने मोतिहारी जिला स्कूल का निरीक्षण किया और इस दौरान उन्होंने करीब एक घंटे तक बच्चों की क्लास ली। उन्होंने ब्लैकबोर्ड पर चॉक चलाकर बच्चों को पढ़ाया, उनसे सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना। बच्चों ने भी बिना किसी झिझक के डीएम के सामने अपनी बात रखी। जिलाधिकारी ने स्कूल की विभिन्न व्यवस्थाओं का मुआयना करने के बाद संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। शिक्षा व्यवस्था की इस व्यापक जांच में जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। अपर समाहर्ता (लोक शिकायत) मुकेश कुमार सिन्हा ने मंगल सेमिनरी का निरीक्षण किया। वहीं, एमजेके बालिका इंटर कॉलेज का जायजा लेने की जिम्मेदारी उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार ने संभाली। उप विकास आयुक्त ने छात्राओं से उनकी पढ़ाई और सुविधाओं को लेकर लंबी बातचीत की। इस दौरान छात्राओं ने विद्यालय परिसर में कैंटीन शुरू करने की मांग रखी, जिस पर उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया। अधिकारियों का यह निरीक्षण केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं था। सभी 33 मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लास, साइंस लैब, ईको लैब, कंप्यूटर लैब, ई-लाइब्रेरी और खेलकूद से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी गहन जांच की गई। इन स्कूलों को आधुनिक संसाधनों से लैस किया जा रहा है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
स्मार्ट क्लास से लेकर लैब तक की हुई सघन जांच
प्रशासन ने इस निरीक्षण को केवल भौतिक जांच तक सीमित नहीं रखा। अधिकारियों ने कई स्कूलों में आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी में भी हिस्सा लिया। उन्होंने अभिभावकों से बातचीत कर स्कूल की सुविधाओं, बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर उनका फीडबैक लिया। ज्ञात हो कि बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत जुलाई 2026 में पूरे राज्य में 551 ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ का लोकार्पण किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर शिक्षा प्रदान करना है। जिला प्रशासन का कहना है कि इस तरह के औचक निरीक्षण और संवाद का मुख्य उद्देश्य केवल कमियां खोजना नहीं है, बल्कि नियमित निगरानी और आपसी समन्वय के जरिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।



