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बाढ़ पीड़ितों के दर्द पर मरहम: बीएमएसआईसीएल ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए 30 करोड़ रुपये

पटना। बिहार में आई प्रलयंकारी बाढ़ से मचे हाहाकार के बीच पीड़ितों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ने लगे हैं। राज्य के बाढ़ प्रभावित परिवारों की त्वरित सहायता और राहत कार्यों को गति देने के लिए बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) ने एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। संस्था की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 30 करोड़ रुपये की विशाल सहयोग राशि प्रदान की गई है। यह राशि बाढ़ के कारण बेघर हुए और संकट का सामना कर रहे लाखों लोगों के पुनर्वास व उनके दर्द पर मरहम लगाने में मील का पत्थर साबित होगी।मंगलवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित एक सादे लेकिन गरिमामय कार्यक्रम में बीएमएसआईसीएल के उच्च अधिकारियों ने यह चेक सौंपा। बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन ने राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को 30 करोड़ रुपये का चेक भेंट किया। इस अवसर पर सरकार के कई आला अधिकारी और मंत्री मौजूद रहे। विशेष रूप से राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने भी इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

संकट की घड़ी में सहयोग के लिए सीएम ने जताया आभार

चेक स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस आपदा की घड़ी में बीएमएसआईसीएल द्वारा दिखाई गई इस सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने संस्था के अधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संकट के समय में किया गया यह बड़ा आर्थिक सहयोग राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि इस पूरी राशि का उपयोग पूर्णत: पारदर्शिता के साथ राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार का लक्ष्य अंतिम कतार में खड़े अंतिम पीड़ित तक मदद पहुंचाना है। इस कठिन परिस्थिति में बीएमएसआईसीएल जैसी संस्थाओं का यह सहयोग इस लक्ष्य को हासिल करने में संजीवनी का काम करेगा।”

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा और राहत पर जोर

विदित हो कि इस वर्ष बिहार की प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिससे राज्य के कई जिलों में जलप्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। हजारों गांव जलमग्न हैं और लाखों की आबादी को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। ऐसे में राहत शिविरों का संचालन, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, और खाद्य सामग्री का वितरण सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि बीएमएसआईसीएल का मूल कार्य राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है, लेकिन आपदा के समय में संस्था ने अपनी व्यापक जिम्मेदारी निभाई है। स्वास्थ्य विभाग और उससे जुड़ी सभी इकाइयां इस प्राकृतिक आपदा में जनता के साथ मजबूती से खड़ी हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलजनित और संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए भी विभाग पूरी तरह मुस्तैद है।बीएमएसआईसीएल का यह 30 करोड़ का अनुदान बाढ़ पीड़ितों के जीवन को दोबारा पटरी पर लाने, टूटे हुए आशियानों को संवारने और उन्हें एक नई शुरुआत देने के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है। इस फंड के जरिए अब प्रभावित क्षेत्रों में और अधिक तेजी से राहत सामग्री पहुंचाई जा सकेगी।

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