
पटना। शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव और शिक्षकों के हित में कई ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं। राज्य के सात लाख से अधिक शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से अपडेट रखने के लिए सरकार जल्द ही एक अलग ‘शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय’ की स्थापना करेगी। इसके साथ ही, शिक्षकों को समय पर वेतन भुगतान और लंबे समय से संघर्षरत वित्त रहित शिक्षकों के लिए नए वेतनमान का खाका भी तैयार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल स्कूलों में संसाधन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, शिक्षकों का क्षमता वर्धन भी उतना ही आवश्यक है। इस नए विश्वविद्यालय के जरिए शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए अलग-अलग संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्हें एक ही छत के नीचे आधुनिक तकनीक और बदलते शैक्षणिक माहौल के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा।
उच्च शिक्षा के लिए बीएचयू व बीआईटी का होगा विस्तार
शिक्षकों के वेतन भुगतान में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए सरकार एक नया इकोसिस्टम विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि अब शिक्षकों को हर महीने वेतन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा, मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों के लंबित बकाया वेतन का भुगतान इसी सितंबर माह में सुनिश्चित किया जाएगा।लंबे समय से नियमित वेतन की मांग कर रहे वित्त रहित शिक्षकों को सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। संस्थानों के आंतरिक संसाधनों और सरकारी अनुदान को जोड़कर एक नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे इन शिक्षकों को सम्मानजनक नया वेतनमान मिल सकेगा।छात्रों का पलायन रोकने के लिए बिहार में ही उच्च शिक्षा के बेहतरीन विकल्प तैयार किए जा रहे हैं। राज्य सरकार बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) का सेंटर खोलने और बीआईटी मेसरा (BIT Mesra) के केंद्र को 2030 तक विस्तारित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। साथ ही, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निजी विश्वविद्यालयों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।



