
पटना। बिहार में भ्रष्ट लोक सेवकों और रिश्वतखोर अधिकारियों के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) ने अपना शिकंजा और कस दिया है। राज्य में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से ब्यूरो लगातार आक्रामक कार्रवाई कर रहा है। इसी कड़ी में निगरानी ब्यूरो ने आम जनता से खुलकर आगे आने और भ्रष्ट अधिकारियों की शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि जनता द्वारा दी गई हर शिकायत का त्वरित सत्यापन किया जाएगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) जितेंद्र सिंह गंगवार ने शुक्रवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में रिश्वतखोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि निगरानी ब्यूरो ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए इस साल अब तक 124 एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज की हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि घूसखोरों पर नकेल कसने के लिए विभाग पूरी तरह से मुस्तैद है। एडीजी ने कहा कि हमारी टीम लगातार भ्रष्ट बाबुओं और अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है।
बक्सर में ट्रैप, दारोगा रंगे हाथों गिरफ्तार
भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे इस महाभियान के तहत शुक्रवार को बक्सर जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। निगरानी की विशेष टीम ने जाल बिछाकर एक भ्रष्ट दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) को 50 हजार रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि उक्त पुलिस अधिकारी एक मामले में पक्षपात करने और अनुचित लाभ पहुंचाने के एवज में इस मोटी रकम की मांग कर रहा था। पीड़ित की शिकायत के बाद निगरानी ने मामले का गुप्त रूप से भौतिक सत्यापन किया और आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप कर दारोगा को दबोच लिया। इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे और अन्य सरकारी कार्यालयों में हड़कंप मच गया है। एडीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने प्रदेश की आम जनता को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि लोग भ्रष्टाचार को सिरे से ‘ना’ कहना सीखें। यदि कोई भी सरकारी लोक सेवक, अधिकारी या कर्मचारी किसी काम के एवज में, योजना का लाभ देने या फाइल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग करता है, तो डरें नहीं, बल्कि आगे आएं। आम नागरिक अपनी शिकायत सीधे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के मुख्यालय, ‘छह सर्कुलर रोड, पटना’ स्थित कार्यालय में दर्ज करा सकते हैं। एडीजी ने भरोसा दिलाया है कि शिकायत मिलते ही मामले का भौतिक सत्यापन किया जाएगा और पुख्ता तथ्यों के आधार पर नियमानुसार सख्त कानूनी कदम उठाया जाएगा।
17 वर्षों की बेदाग सेवा, शालिग्राम कुमार बने डीएसपी
एक तरफ जहां भ्रष्ट अधिकारियों पर गाज गिर रही है, वहीं ईमानदार और समर्पित अधिकारियों को उनके उत्कृष्ट कार्य का इनाम भी मिल रहा है। गृह विभाग की ओर से मिली प्रोन्नति के तहत, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में पिछले 17 वर्षों से सेवारत शालिग्राम कुमार को पदोन्नति दी गई है। शालिग्राम कुमार को पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर) के पद से प्रोन्नत कर अब पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर पदस्थापित किया गया है। उनके बेहतरीन, निष्कलंक और समर्पित सेवाकाल को देखते हुए विभाग ने यह महत्वपूर्ण प्रोन्नति दी है। इस खास अवसर पर पटना स्थित ब्यूरो के मुख्यालय में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें वरीय अधिकारियों ने उन्हें सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।कुल मिलाकर, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की यह सक्रियता बिहार में सुशासन के दावे को और मजबूत करती है। ब्यूरो ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार से समझौता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



