
भागलपुर। बिहार के सुप्रसिद्ध सिल्क सिटी भागलपुर में गंगा नदी की उफनाती लहरों ने तबाही मचा रखी है। जिले में बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। पहले से ही बदहाल एनएच-80 के बाद अब महत्वाकांक्षी मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन पर भी बाढ़ का पानी चढ़ गया है। सड़क के ऊपर करीब दो फीट तक पानी बह रहा है, जिससे राजधानी पटना और भागलपुर के बीच का सीधा सड़क संपर्क टूटने की कगार पर पहुंच गया है।गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, फोरलेन के कम से कम तीन अलग-अलग स्थानों पर पानी का तेज बहाव सड़क के ऊपर से हो रहा है। यदि जलस्तर बढ़ने का यह सिलसिला नहीं थमता है, तो इस नए मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो सकती है।
इंजीनियरिंग और डीपीआर पर उठे गंभीर सवाल
इस आपदा के बीच स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में प्रशासनिक व्यवस्था और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस फोरलेन का डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट), नक्शा और स्ट्रक्चर तैयार करने वाले अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरती है। जानकारों का कहना है कि इंजीनियरों को पहले से पता था कि क्षेत्र के कौन से हिस्से निचले हैं और कहां भारी जलजमाव की समस्या होती है, इसके बावजूद उन जगहों पर सड़क के स्तर को नीचा छोड़ दिया गया। आज उसी अदूरदर्शिता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
यातायात प्रभावित, बढ़ी मुश्किलें
फोरलेन पथ पर लगातार बढ़ते पानी के दबाव के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई छोटे वाहन बीच रास्ते में ही फंस रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित निर्माण कंपनी की सुस्ती के कारण लोगों में गुस्सा उफन रहा है।बाढ़ के इस विकराल रूप को देखते हुए जिला प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि, जमीनी स्तर पर सुरक्षा और वैकल्पिक मार्गों के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यदि जल्द ही जलस्तर में कमी नहीं आई, तो भागलपुर का सड़क मार्ग से संपर्क देश और राज्य के अन्य हिस्सों से पूरी तरह कट सकता है।



