
पटना। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा पटना में दिए गए विवादित बयान के बाद बिहार की सियासत का पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई इस कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। पटना में खरगे के खिलाफ परिवाद दायर होने के बाद, अब इस विरोध की आंच रोहतास जिले के सासाराम तक पहुंच गई है। यहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए नगर थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के लिए एक औपचारिक आवेदन सौंपा है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, सासाराम नगर अध्यक्ष संदीप कुमार सोनी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल पूरे दलबल के साथ सासाराम नगर थाना पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में केवल राजनीतिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि भाजपा विधिक प्रकोष्ठ (लीगल सेल) के कई नामचीन अधिवक्ता भी शामिल थे, जिन्होंने इस पूरे मामले को कानूनी जामा पहनाने में अहम भूमिका निभाई। थाने पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी और उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकाली और पुलिस प्रशासन से अविलंब मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगाई।
खरगे के बयान पर संग्राम
भाजपा नेताओं का स्पष्ट तौर पर कहना है कि बीते दिनों पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेता ने जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया, वह न केवल निंदनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करने वाला है। नगर अध्यक्ष संदीप कुमार सोनी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल एक राजनीतिक दल के नेता नहीं हैं, बल्कि वे सवा सौ करोड़ से अधिक देशवासियों के चुने हुए प्रधान हैं। उनके खिलाफ इस तरह की ओछी और आपत्तिजनक टिप्पणी करना सीधे तौर पर देश के करोड़ों लोगों के जनमानस को ठेस पहुंचाने के समान है।विधिक प्रकोष्ठ के अधिवक्ताओं ने आवेदन में इस बात का प्रमुखता से उल्लेख किया है कि राष्ट्रीय स्तर के एक बड़े राजनेता द्वारा सार्वजनिक मंच से दिया गया ऐसा भड़काऊ बयान समाज में वैमनस्यता फैलाने और देश में शांति भंग करने का एक सुनियोजित प्रयास हो सकता है। भाजपा नेताओं ने मांग की है कि इस कृत्य को गंभीरता से लेते हुए मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत और कठोर धाराओं के तहत अविलंब मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि कानून की नजर में सभी समान हैं और ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयानों के लिए सख्त सजा का प्रावधान होना ही चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी नेता ऐसी अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने से पहले सौ बार सोचे।
कांग्रेस अध्यक्ष पर कसेगा कानूनी शिकंजा?
इधर, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सासाराम नगर थाना में उपस्थित पुलिस अधिकारियों ने बिना किसी विलंब के भाजपा प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनीं। थाना प्रभारी के निर्देश पर ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए लिखित आवेदन को विधिवत रिसीव कर लिया है। प्रक्रिया का पालन करते हुए पुलिस ने आवेदन की एक पावती (रिसीविंग कॉपी) भी शिकायतकर्ताओं को उपलब्ध करा दी है।फिलहाल पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त आवेदन का वरीय अधिकारियों और कानूनी जानकारों के निर्देशानुसार अध्ययन किया जा रहा है। मामले के क्षेत्राधिकार (ज्यूरिस्डिक्शन) और बयानों की सत्यता की जांच के बाद ही आगे की उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल, सासाराम में हुए इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाली नहीं है। आने वाले दिनों में यह विवाद बिहार के हर जिले में तूल पकड़ सकता है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक नया और तीखा दौर शुरू होने की पूरी संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी और उसके बाद शुरू हुआ यह कानूनी दांव-पेंच आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण को और भी तेज करेगा।



